राफेल विवाद: अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया – CAG रिपोर्ट के तीन पन्नों को अदालत को नहीं सोंपा

7:21 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्‍ली:  राफेल डील को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दाखिल पुनर्विचार याचिका पर गुरुवार को केंद्र के विशेषाधिकार के दावे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति पर फैसला लेने के बाद ही तथ्यों पर विचार किया जाएगा।

केंद्र ने अदालत में कहा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता गैरकानूनी तरीके से प्राप्त किए गए विशेषाधिकार वाले दस्तावेजों को आधार नहीं बना सकते। वहीं, अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि हमने जो दस्तावेज दाखिल किए हैं या जिन्हें आधार बनाया है, उनका राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है।

इस दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि राफेल डील केस में हमने सीएजी की रिपोर्ट सबमिट करने के दौरान एक गलती कर दी है। सीएजी रिपोर्ट के शुरुआती तीन पन्ने कोर्ट को नहीं सौंपे गए हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार भी चाहती है कि सीएजी रिपोर्ट के पहले तीन पन्ने भी कोर्ट में ऑन रिकॉर्ड दस्तावेज के तौर पर शामिल किए जाएं।

वहीं चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने शीर्ष अदालत के आदेश पर पुर्निवचार का अनुरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं से कहा कि पहले वह लीक हुए दस्तावेजों की स्वीकार्यता के बारे में प्रारंभिक आपत्तियों पर ध्यान दें। पीठ ने कहा, ‘‘केन्द्र द्वारा उठाई गयी प्रारंभिक आपत्तियों पर फैसला करने के बाद ही हम मामले के तथ्यों पर गौर करेंगे। ’’

प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल के अलावा ऐसा कोई अन्य रक्षा सौदा नहीं है जिसकी कैग रिपोर्ट में कीमतों का विवरण संपादित किया गया हो। भूषण ने कहा कि राफेल सौदे में भारत सरकार और फ्रांस सरकार के बीच कोई करार नहीं है, क्योंकि फ्रांस ने इसमें कोई संप्रभु गारंटी नहीं दी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम में पत्रकारों के सूत्रों के संरक्षण के प्रावधान हैं।

प्रशांत भूषण ने न्यायालय से कहा कि राफेल के जिन दस्तावेजों पर अटार्नी जनरल विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं, वे प्रकाशित हो चुके हैं और सार्वजनिक दायरे में हैं। भूषण ने कहा कि सूचना के अधिकार कानून के प्रावधान कहते हैं कि जनहित अन्य चीजों से सर्वोपरि है और खुफिया एजेन्सियों से संबंधित दस्तावेजों पर किसी प्रकार के विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता।

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