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पुणे: भीमा-कोरेगांव हिंसा में पुणे पुलिस की ओर से दलित नेता और जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ भड़काऊ भाषण का मामला दर्ज किया गया है. इस मामले में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मेवाणी का खुलकर बचाव किया.

अठावले ने कहा कि एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव के युद्ध के 200 साल पूरे होने से पहले भी इस इलाके में तनाव था. उन्होंने कहा, जिग्नेश भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार नहीं है.

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उन्होंने बताया, मैंने इलाके का दौरा किया था और तनाव कम हुआ था. इसलिए मैं 31 दिसंबर को दिल्ली वापस चला गया था. इसी दिन, जिग्नेश ने पुणे में अपना भाषण दिया था. वह भीमा-कोरेगांव नहीं गए थे.

अठावले ने दावा किया कि कुछ संगठनों ने रात में बैठक की थी और उसके बाद एक जनवरी को हिंसा हुई. ध्यान रहे एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव के युद्ध के 200 साल पूरे होने पर शोर्य दिवस मनाने पहुंचे दलितों को हिंसा का सामना करना पड़ा था.

इस मामले में जिग्नेश पहले ही कह चुके है कि वह मैं भीमा कोरेगांव की उस जगह पर गया ही नहीं, मेरे भाषण का कोई भी हिस्सा कानून के मुताबिक भड़काऊ नहीं है. महाराष्ट्र में जो बंद बुलाया गया उस दिन महाराष्ट्र में मौजूद होने के बावजूद मैंने उसमें हिस्सा नहीं लिया. जब मैंने कुछ किया ही नहीं तो फिर मेरी वजह से हिंसा कैसे हुई.

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