नई दिल्ली | दुनिया में बढ़ते आतंकवाद के खात्मे के लिए लगभग सभी देश एकजुट है. वो चाहते है की दुनिया से आतंकवाद समाप्त हो. इसके लिए कुछ देश ,आतंकवादी संगठनो के खिलाफ लगातार कार्यवाही भी कर रहे है. लेकिन इस दौरान काफी मानवाधिकारो का उलंघन भी सामने आता है. ऐसे में यह बहस काफी सालो से जारी है की मानवाधिकारो को एक तरफ कर आतंकवाद को खत्म किया जाना सही है या नही?

इसी मामले पर बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री एम्जे अकबर ने कहा की मानवतावाद को सबसे ज्यादा खतरा ही आतंकवाद से है. ऐसे में किसी फसादी को खत्म करना एक पुरे समुदाय को बचाने जैसा है. नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड के एक कार्यक्रम में बोलते हुए अकबर ने कहा की धर्मग्रंथ ‘कुरान’ भी किसी फसादी को खत्म करने की इजाजत देती है. क्योकि जब किसी फसादी का खत्म किया जाता है तो सभी इंसानों के अधिकारों की रक्षा की जाती है.

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अकबर ने कट्टरता पर बोलते हुए कहा की मुस्लिमो के कुछ धडो में कट्टरता का प्रसार हो रहा है जिससे इस्लाम के सही सन्देश और वास्तिवकता के पीछे छूटने का खतरा मंडरा रहा है. चूँकि भारत में अभी अधिकांश मुस्लिम कट्टरता के शिकार नही हुए है इसलिए इसके प्रसार को रोकने के लिए जरुरी कदम उठाने की आवश्यकता है. इसके लिए हमें सुरक्षा एजेंसीज के साथ साथ विचारो के स्तर पर भी लड़ाई लड़नी होगी.

अकबर ने लस्कर और ISIS जैसे संगठनों पर हमला करते हुए कहा की ये लोग धर्म का इस्तेमाल कर अपना राजनितिक लक्ष्य हासिल करना चाहते है. जबकि मेरे इस्लामिक विश्वास के अनुसार धर्म में राजनितिक मतभेद तो पैगम्बर मोहम्मद की म्रत्यु के बाद ही उभरकर सामने आ गया था. यही वजह है की शिया और सुन्नी के बीच संघर्ष जारी है. अकबर ने धर्म को राष्ट्रवाद का आधार मानने से भी इनकार कर दिया. उन्होने कहा की अगर ऐसा होता तो 22 अरब देश न बनते.

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