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पंजाब सरकार ने पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक करतारपुर गुरुद्वारे को भारत का हिस्सा बनाने के लिए पाकिस्तान के साथ ज़मीन की अदला-बदली का प्रस्ताव पास किया। सर्वसम्मति से पास किए गए इस प्रस्ताव को पंजाब सरकार अब केंद्र के पास भेजेगी।

प्रस्‍ताव के अनुसार पाकिस्‍तान श्री करतारपुर गुरुद्वारे की जमीन भारत को दे दे और इसके बदल में उसे इतनी ही जमीन अन्‍य स्‍थान पर दे दी जाए। विधानसभा के सत्र के दौरान करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोले जाने को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र सरकार की प्रशंसा के लिए प्रस्ताव पेश किया गया।

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इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शिअद विधायक व पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव भी इसमें शामिल करना चाहिए। इसके बाद मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इसे प्रस्‍ताव में शामिल कर लिया। प्रस्ताव बिना किसी विरोध के पास हो गया।

प्रस्ताव के दौरान कैप्टन ने नवजोत सिंह सिद्धू का नाम नहीं लिया, जबकि आप ने कॉरिडोर का श्रेय सिद्धू को दिया। कैप्टन ने कहा कि कॉरिडोर भारत-पाकिस्तान बीच ‘अमन का सेतु’ बनेगा।

प्रस्‍ताव पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक कुलतार सिंह संधवा व कंवर संधू ने कहा कि नवजोत सिद्धू पाकिस्तान से शांति का संदेश लेकर आए है। सीमा पर गोलीबारी की शुरुआत पाक करता रहा है। मुख्यमंत्री चुनिंदा यादों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने कहा कि कॉरिडोर खुलने का श्रेय नवजोत सिंह सिद्धू को जाता है।

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कॉरिडोर मामले पर कहा, ‘सिद्धू जी हम साथ चलेंगे। यह अच्छी शुरुआत है। इसे नकारात्मक रूप से नहीं देखना चाहिए। कॉरिडोर खुलता है तो वहां पर भी फुलप्रूफ इंतजाम होंगे।’ वहीं, सिद्धू से कहा कि श्री गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व मानने के लिए अकाली दल की जहां भी जरूरत हो वह साथ चलेंगे।

बता दे कि करतारपुर साहिब पाकिस्तान में आता है, लेकिन भारत से इसकी दूरी महज़ साढ़े चार किलोमीटर है। सिख मान्यताओं के मुताबिक़, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 1522 में करतारपुर आए थे और उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 18 साल यहीं गुज़ारे थे।

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