Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

कर्फ्यू में कश्मीर की कवरेज के लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित हुए तीन फोटोग्राफर

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कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद फीचर फोटोग्राफी करने के लिए एसोसिएटेड प्रेस के तीन फोटोग्राफर डार यासीन, मुख्तार खान और चन्नी आनंद को 2020 के पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इन तीनों ने लॉकडाउन और कर्फ्यू के दौरान कश्मीर में फोटोग्राफी की थी।

इन तीनों ने ऐसे समय फोटोग्राफी की जब कश्मीर की कहानी दुनिया दिखा पाना बहुत ही मुश्किल था। अपनी जान को जोखिम में डालकर कभी-कभी अजनबियों के घरों में कवरेज करना जाना होता था। कई बार सब्जियों के बोरों में कैमरे को छिपाना तक पड़ जाता था।

तीन फ़ोटोग्राफ़रों ने विरोध प्रदर्शन, पुलिस और अर्धसैनिक कार्रवाई और दैनिक जीवन में घट रही घटनाओं को अपने कैमरे में कैद किया और इन फोटो को एजेंसी के दिल्ली ऑफिस तक पहुंचाया। उन्होने बताया, हम एयरपोर्ट पर दिल्ली जाने वाले यात्री को मेमोरी कार्ड ले जाने के लिए मनाते थे।

उन्होंने बताया कि इन सभी चीजों ने हमें और दृढ़ बना दिया, यह काम एक तरह से चूहे और बिल्ली की तरह लुका छिप्पी का था। यासीन और खान कश्मीर के सबसे बड़े शहर श्रीनगर में हैं, जबकि आनंद पड़ोसी जम्मू जिले में है। पुलित्जर फीचर फोटोग्राफी पुरस्कार पत्रकारिता का एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है।

यासिन और मुख्तार श्रीनगर में रहते हैं, जबकि आनंद जम्मू जिले के निवासी हैं। यासिन ने अपने करियर की शुरुआत एपी में 2004 में फ्रीलांस वीडियोग्राफर के रूप में की थी। 2006 में उन्हें एजेंसी को पूर्ण रूप से फोटोग्राफर के रूप में जॉइन किया। 16 साल के करियर के दौरान डार यासीन ने कश्मीर में विकास के साथ-साथ रोहिंग्या संकट, अफगानिस्तान श्रीलंका और दूसरी जगहों को अपने कैमरे से दिखाया।

मुख्तार खान भी साल 2000 से एपी से जुड़े हुए हैं। वह अब तक पूरे कश्मीर को कवर कर चुके हैं। आनंद उनके साथी ने जम्मू में विकास की तस्वीरें क्लिक कीं। पुलित्जर अवॉर्ड जूरी ने इनकी तस्वीरों को स्ट्राइकिंग इमेजेस ऑफ लाइफ बताया। जम्मू में रहने वाले चन्नी आनंद ने बताया कि 20 साल एपी के साथ काम करने के बाद यह इनाम मिला।

पुरस्कार जीतने पर बेहद खुश आनंद ने कहा, ‘मैं आश्चर्यचकित हूं। मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है।’ देर रात इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा हुई। इन तीनों ने घाटी के सामान्य जनजीवन के साथ ही प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों की तस्वीरों को भी दुनिया तक पहुंचाया।

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