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आगरा. पुरातत्व विभाग द्वारा ताजमहल के शाही मस्जिद में रोज होने वाली नमाज पर लगाई गई रोक के खिलाफ मुस्लिम समुदाय ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिये है। बता दें कि जुम्मे को छोड़ बाकि दिनों होने वाली नमाज पर पाबंदी लगा दी गई है।

इमाम सैयद सादिक अली ने बताया कि एएसआई के अधिकारियों ने रविवार को नमाज के बीच मे आकर उन्हें नमाज पढ़ाने से रोका। वहां के वजू टैंक में नमाज के लिए वजू कर रहे लोगों को हटाया। उन्होंने कहा कि ईद, बकरीद और रमजान में तराबी के साथ जुमा की नमाज और रोजाना की नमाज होती रही हैं और इसके लिए यहां विभाग की तरफ से इमाम की नियुक्ति है। उसके बाद भी नमाज को रोकना गलत है। कोई भी बाहर का व्यक्ति यहां नमाज नही पढ़ता। सिर्फ कर्मचारी रोजाना की नमाज में शामिल होते हैं। इस मामले में उन्होने एडीएम सिटी से मुलाकात की है। उन्हें ज्ञापन सौंपा है।

ताजमहल मस्जिद इंतजामियां कमेटी के अध्यक्ष इब्राहिम ज़ैदी का कहना है, “दो दिन पहले मस्जिद के इमाम सैय्यद सादिक अली मस्जिद में मौजूद थे। तभी वहां ताजमहल के संरक्षण सहायक अंकित नामदेव वहां आए और मौखिक रूप से इमाम साहब को वहां नमाज़ पढ़ाने और पढ़ने से मना कर दिया।

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इतना ही नहीं जो पर्यटक उस वक्त वहां नमाज़ पढ़ने के जा रहे थे उन्हें भी मना कर भगा दिया। पूछने पर अधिकारियों ने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि कहीं कोई पर्यटक वज़ू बनाने वाले हौज में न गिर जाए। जबकि आजतक हौज में कोई भी पर्यटक या बच्चा नहीं गिरा है।”

वहीं नामदेव का कहना है कि “ताजमहल में सिर्फ शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने का सुप्रीम कोर्ट का आर्डर है। इसलिए शुक्रवार के अलावा वहां नमाज़ का कोई नियम नहीं है। दूसरे पर्यटकों की सुरक्षा की द्रष्टि से भी हौज को बंद किया गया है। ऐसा करने के आर्डर हमे ऊपर से मिले हैं।”

लेकिन संरक्षण सहायक के सुप्रीम कोर्ट वाली बात पर ताजमहल मस्जिद इंतजामियां कमेटी के अध्यक्ष इब्राहिम ज़ैदी का कहना है, “ताजमहल शुक्रवार को बंद रहता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा था कि नमाज़ के लिए ताजमहल शुक्रवार को भी खोला जाए। न कि ये कहा था कि सिर्फ शुक्रवार को ही नमाज़ होगी।”

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