Monday, June 27, 2022

Prophet row : पूर्व न्यायाधीशों, वकीलों ने सीजेआई से यूपी सरकार की अवै’ध कार्रवाई को रोकने की अपील की, दायर की याचिका

- Advertisement -

उत्तर प्रदेश में हुए शुक्रवार को विरोध बाद ‘deteriorating law and order’ की कंडीशन साफ़ देखने को मिली , former high court judges, and Supreme Court judges ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की ‘illegal’ गतिविधियों पर स्वत: संज्ञान लेने की मांग की है।

Chief justice of India, NV Ramana, को संबोधित एक याचिका पत्र में, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं सहित 12 न्यायविदों ने मांग की ही है कि प्रदर्शनकारियों और पुलि’स द्वारा ‘अवैध गिरफ्ता’रियां करना और आवासों पर बुलडोजर चलाना और पुलि’स की हिं’सा’ का स्वत: संज्ञान लिया जाए।

पैगंबर मुहम्मद साहब (PBUH) पर अपनी टिप्पणी को लेकर अब निलंबित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ विरो’ध प्रदर्शन शुक्रवार को हिं’सक हो गया था जिसके चलते यूपी के अधिकारियों ने कथित तौर पर वारंट के बिना भारत के नेता जावेद मोहम्मद को गिर’फ्तार कर लिया, और उनकी पिटाई कर दी और इसके साथ ही मुख्य साजिशकर्ता होने का आरो’प लगाते हुए उनके घर पर बुलडोज़र चलाया था।

उन्होंने CJI से राज्य के अधिकारियों द्वारा यूपी के नागरिकों की हिं’सा और दमन का तत्काल संज्ञान लेने का आग्रह किया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलि’स ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980, और उत्तर प्रदेश गैंग’स्टर्स और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत आरो’पियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसने “प्रदर्शनकारियों को क्रूर’ता और गैर’कानूनी रूप से प्रता’ड़ित करने के लिए पुलि’स को प्रोत्साहित किया है।

वि’रोध के बाद, पुलिस द्वारा गिर’फ्तार किए गए लोगों की बेर’हमी से पि’टाई करने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसके बाद प्रशास’न ने हिं’सा के आरो’पी और अन्य लोगों को ‘अवै’ध रूप से’ गिर’फ्तार करने और उनके घरों को तोड़ने की मांग की थी ।

पत्र याचिका निम्नलिखित द्वारा लिखी गई है: न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी, पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय – न्यायमूर्ति वी. गोपाल गौड़ा, पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय-जस्टिस ए.के. गांगुली, पूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट – न्यायमूर्ति ए पी शाह, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय – न्यायमूर्ति के चंद्रू, पूर्व न्यायाधीश, मद्रास उच्च न्यायालय और न्यायमूर्ति मोहम्मद अनवर, पूर्व न्यायाधीश, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं।

- Advertisement -

Hot Topics

Related Articles