राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मुंबई में इंडिया टुडे कॉनक्लेव 2017 में कहा कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए संस्थाओं को काम करना होगा.

उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में सत्ता के केन्द्र प्रधानमंत्री है और प्रधानमंत्री लोगों से ही सत्ता का अधिकार पाते हैं. उन्होंने कहा कि राज करने के लिए बहुमत नहीं सर्वमत की आवश्यकता होती है. इसी के साथ उन्होंने देश में अब मजबूत विपक्ष की आवश्यकता भी बताई.

राष्ट्रपति ने संसद की कार्यवाही पर भी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि संसद में कामकाज के दिन कम हो रहे हैं. संसद में शोर-शराबे की संस्कृति बंद होनी चाहिए. कश्मीर समम्स्या को लेकर उन्होने पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी से सबक लेने को कहा. उन्होंने आगे कहा, वाजपेयी अपने साथ काम करने वाले लोगों की कद्र करना जानते थे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली के बारे में बोलते हुए राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा, “उनके पास पीएम बनने से पहले तक संसद का कोई अनुभव नहीं था. मौजूदा प्रधानमंत्री का काम करने का अलग तरीका है. मोदी एक राज्य से आकर सीधे प्रधानमंत्री बने. राज्य की सत्ता से आने के बाद पीएम मोदी ने खुद को नये रोल में बखूबी ढाला. राष्ट्रपति ने कहा कि वह राष्ट्रपति से हटते ही सार्वजनिक जीवन से हमेशा के लिए संन्यास ले लेंगे.

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