नई दिल्ली | दिल्ली एमसीडी चुनावो में करारी हार झेलने के बाद बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रामण्यम स्वामी ने राष्ट्रपति से मांग की है की वो दिल्ली की केजरीवाल सरकार को तुरंत बर्खास्त कर दोबारा चुनाव कराने का आदेश दे. इसके अलावा दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी अरविन्द केजरीवाल से इस्तीफा देने की मांग की है. अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने भी इस पर अपने विचार रखे है.

जस्टिस काटजू हमेशा से अपने बयानों के लिए सुर्खियों में रहते है. ज्यादातर समय उनके निशाने पर मोदी सरकार ही रही है लेकिन इस बार उन्होंने दिल्ली की केजरीवाल सरकार को भी निशाने पर लिया है. उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट शेयर की है जिसमे बताया गया है की राष्ट्रपति के पास इस बात के उचित आधार है की वो केजरीवाल सरकार को बर्खास्त कर सके.

उन्होंने इस पोस्ट में लिखा है ,’ दिल्ली की केजरीवाल सरकार बर्खास्त हो सकती है. एमसीडी चुनावो के नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति के पास केजरीवाल सरकार को बर्खास्त करने और दोबारा चुनाव कराये जाने के उचित आधार है.’ काटजू ने अपने तर्क को सही साबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का जिक्र किया. उन्होंने बताया की 1977 सुप्रीम कोर्ट ऐसा फैसला सुना चुकी है.

काटजू ने बताया की 1977 में राजस्थान सरकार बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया एआईआर1997 एससी 1361 केस में सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्य पीठ ने फैसला सुनाया था की अगर कोई पार्टी किसी भी चुनावो में बुरी तरह पराजित हो जाती है तो इसका मतलब यह है की इस पार्टी में अब लोगो का विश्वास नही है और जनता इस पार्टी के खिलाफ हो चुकी है. यह पराजय यह भी दर्शाती है की पार्टी और जनता के बीच दूरी बन चुकी है.

काटजू ने आगे कहा की लोकतंत्र में लोगो की राय ही सबसे महत्तवपूर्ण होती है. और यह माना जाता है की विधायक जनता का प्रतिनिधित्व होता है. इसलिए अगर बाद में वो कोई चुनाव हारते है तो इसका अर्थ यह है की अब जनता को उस पार्टी के ऊपर यकीन नही रहा है. ऐसी सरकारों को संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत बर्खास्त किया जा सकता है और नए चुनाव के आदेश दिए जा सकते है.

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