Monday, September 20, 2021

 

 

 

नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम डायरेक्टर बनाए जाने के खिलाफ SC पहुंचे प्रशांत भूषण

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नई दिल्ली: सीबीआई में जारी विवाद अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को हटाए जाने के बाद एम. नागेश्वर राव को सीबीआई के अंतरिम प्रमुख के रूप में चुने जाने के खिलाफ एनजीओ कॉमन कॉज ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

बता दें कि आलोक वर्मा को पीएम मोदी की सदस्यता वाली उच्च स्तरीय कमिटी की ओर से हटाए जाने के बाद नागेश्वर राव को अंतरिम मुखिया के तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। 10 जनवरी को वर्मा को हटाने के फैसले के बाद उन्हें फायर सर्विस, सिविल डिफेंस और होम गार्ड्स का डीजी बनाया गया था। हालांकि उन्होंने इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने से ही इनकार कर दिया और आईपीएस सेवा से ही इस्तीफा दे दिया।  इसके बाद नागेश्वर राव को शीर्ष जांच एजेंसी की दोबारा कमान दी गई।

बता दें, अक्टूबर 2018 में सीबीआई में विवाद के बाद सरकार ने निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। इसके बाद नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बनाया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ आलोक वर्मा कोर्ट पहुंच गए थे। बीती 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को निदेशक के पद पर बहाल करते हुए कहा था कि सरकार सीबीआई निदेशक को नहीं हटा सकती है, सिर्फ सेलेक्ट कमेटी ही हटा सकती है।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय चयन समिति, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एके सीकरी थे, ने 2-1 के बहुमत से आलोक वर्मा को पद से हटा दिया था। सरकार ने अभी तक कोई नया निदेशक नियुक्त नहीं किया है, इसलिए नागेश्वर राव ही अंतरिम निदेशक बने रहेंगे। यानी कि लगभग 3 हफ्ते तक वह इस पद पर बने रह सकते हैं, लेकिन प्रशांत भूषण को इस फैसले से आपत्ति है, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

इससे पहले प्रशांत भूषण ने राकेश अस्थाना को विशेष निदेशक के रूप में नियुक्त करने के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने पुनर्विचार याचिका दायर की, पर इसे भी न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने क्यूरेटिव पिटीशन दायर की, लेकिन दिसंबर, 2018 में न्यायालय ने यह याचिका भी खारिज करते हुए प्रशांत भूषण को फटकार लगाई थी।

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