Sunday, January 23, 2022

CAA के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच बोले प्रणब मुखर्जी – आंदोलनों की लहर लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूत बनाएगी

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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध में देश भर में चल रहे प्रदर्शनों के बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलनों की मौजूदा लहर लोकतंत्र को मज़बूत बनाएगी।

उन्होंने दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय लोकतंत्र को बार-बार परखा गया है। पिछले कुछ महीनों में लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर निकले, विशेष रूप से युवा। वे उन मुद्दों पर अपने विचार रखने के लिए निकले जो उनकी राय में महत्वपूर्ण हैं। संविधान में इनकी आस्था दिल को छूने वाली बात है।

पूर्व राष्ट्रपति ने देश में जारी आंदोलनों से जुड़े किसी मुद्दे का नाम लिए बिना कहा, ‘आम राय लोकतंत्र की जीवन रेखा है। लोकतंत्र में सभी की बात सुनने, विचार व्यक्त करने, विमर्श करने, तर्क वितर्क करने और यहां तक कि असहमति का महत्वपूर्ण स्थान है।’ उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि देश में शांतिपूर्ण आंदोलनों की मौजूदा लहर एक बार फिर हमारे लोकतंत्र की जड़ों को गहरा और मजबूत बनाएगी।’

लोकतंत्र के बारे में प्रणब मुखर्जी ने कहा, भारतीय लोकतंत्र का बार-बार परीक्षण किया गया है और आम सहमति ही लोकतंत्र की जिंदगी है। संविधान में उनका (विरोध करने वाले युवा) विश्वास दिल को छूने वाला है। उन्होंने कहा, लोकतंत्र सुनने, विचार-विमर्श, चर्चा, बहस और यहां तक कि असंतोष पर चलता है।

इस अवसर पर मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, चुनाव आयुक्त अशोक लवासा, सुशील चंद्रा के अलावा तमाम पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयुक्त और अन्य देशों के निर्वाचन अधिकारी मौजूद थे। व्याख्यान को संबोधित करते हुये मुखर्जी ने चुनाव आचार संहिता के महत्व को बरकरार रखने की जरूरत पर भी बल देते हुये कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिये संहिता का निष्ठापूर्वक पालन किया जाना जरूरी है।

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