राष्ट्रवाद के मुद्दे पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के पुर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि लोकलुभावन राष्ट्रवाद आर्थिक विकास के लिए नुकसानदेह है.

राजन ने रविवार को कहा कि लोकलुभावन राष्ट्रवाद आर्थिक विकास को डैमेज करता है. ये अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है क्योंकि ये बांटनेवाला है. यह भेदभाव को लेकर बहुसंख्यक समुदाय में सनसनी फैलाता है. यह भारत सहित पूरी दुनिया में है. लोग शिकायत की इस भावना का फायदा उठाते हैं. देश में आरक्षण का मुद्दा इसका एक उदाहरण है.

उन्होंने कहा, यह महत्वपूर्ण है कि नौकरियों की समस्या को सुलझाया जाए. बहुसंख्यक कम्युनिटी की शिकायतों को बढ़ा-चढ़ा कर नहीं कहा जा सकता, क्योंकि अल्पसंख्यक काफी समय से भेदभाव का सामना कर रहे हैं.  उन्होंने कहा, राष्ट्रवाद देशभक्ति नहीं है, क्योंकि ये बांटता है जो कि खतरनाक है. फिर भी उन लोगों को खारिज करना गलत है जो इन चीजों पर आवाज बुलंद करते हैं. उन्हें गंवार के रूप में खारिज कीजिए.

इस दौरान उन्होंने राजनीति में आने वाली संभावनाओं को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि वो अपने प्रोफेसर की जॉब से खुश है और वो यह उनकी पसंदीदा नौकरी है. आम आदमी पार्टी की और से राज्यसभा भेजे जाने के प्रस्ताव पर राजन ने कहा कि, ‘मुझे क्या पेशकश की गई, इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. उन्होंने इतना जरूर कहा कि, राजनीति के मुद्दे पर मेरी पत्नी ने साफ तौर पर कह रखा है नहीं.

राजनीति में शामिल होने की संभावनाओं पर राजन ने कहा कि नहीं.. राजनीति के मुद्दे पर मेरी पत्नी बिल्कुल साफ मना करती है. उन्होंने कहा, जब मैं आरबीआइ में था, लोग मुझे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भेजने को बेताब थे। जब मैं फिर प्रोफेसर बना, लोग मुझे कहीं और देखने के लिए बेताब हैं.

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