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धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम युवक से शादी करने के बाद कई मुसीबतों का सामना करने वाली हादिया को आखिरकार एक लंबी लड़ाई के बाद आजादी मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए हादिया और शफीन जहाँ की शादी को बहाल कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद हादिया अब अपने पति शफी के साथ रह सकेंगी.

शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान हादिया ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह केवल पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) ही था. जो मेरे पक्ष में था और सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी तौर पर लड़ने में मदद की.

उन्होंने बताया कि जब मैंने इस्लाम को अपना धर्म मानने का फैसला किया, तो मैंने मदद के लिए कई मुस्लिम संगठनों से संपर्क किया. लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया. जमात-ए-इस्लामी और तरबियत इस्लाम नामक संगठन भी मदद के लिए आगे नहीं आए.

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हादिया ने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से सचमुच खुश है. उन्होंने कहा, ‘संविधान हमें अपना धर्म चुनने की आजादी देता है, जो सभी नागरिकों का बुनियादी अधिकार है. यह सारा विवाद इसलिए हुआ, क्योंकि मैंने इस्लाम अपना लिया था.’

हादिया ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के निकाह को बरकरार रखने के बाद हम ऐसा महसूस कर रहे हैं जैसे हमें स्वतंत्रता मिल गई हो. यह केवल पीएफआई थी, जिसने हमारे कठिन समय में हमारी मदद की. जो बात आश्चर्यजनक थी, वह यह कि दो मुस्लिम संगठनों ने हमारी मदद करने से इनकार कर दिया.’

बता दें कि पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) पर हाल ही में झारखंड की बीजेपी सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है. झारखंड सरकार ने आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1908 के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगाया है. बीजेपी सरकार का कहना है कि केरल में गठित पीएफआई के सदस्य आईएस से प्रभावित हैं.

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