फैजाबाद। अयोध्या में 25 नवंबर को वीएचपी और संघ की होने वाली धर्मसभा को लेकर मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा है कि अयोध्या में जो हो रहा है वो भाजपा और आरएसएस का राजनीतिक स्टंट है इसके अलावा कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी-आरएसएस के नजर में सुप्रीम कोर्ट का मामला मंदिर मामले में रुकावट है।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पर हमला बोलते हुए जिलानी ने कहा कि शिवसेना अयोध्या में कार्यक्रम करके यह दिखाना चाहती है कि बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे में सीरियस नहीं है। बकौल जिलानी, आज देश में बीजेपी वीएचपी के जरिए काम कर रही है जबकि अयोध्या की अवाम खौफ में जीने को मजबूर है।

जिलानी ने कहा कि अयोध्या में पब्लिक में मूवमेंट या एक्सप्रेशन नहीं होना चाहिए। क्योकि वो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना होगी। जिलानी ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने यूपी के डीजीपी, होम सेक्रेटरी और चीफ सेक्रेटरी को सुरक्षा के लिए चिट्ठी लिखी है। उन्होंने कहा कि अगर अयोध्या में किसी प्रकार की गड़बड़ी के ठोस सबूत मिले तो हम लोग सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

बता दें कि शिवसेना और वीएचपी के धर्म सभा के बीच हिंदू जागरण मंच अकेले उन्नाव जिले से 200 बसों में 15 हजार लोगों को अयोध्या पहुंचाने की तैयारी चुकी हैं। तो दूसरी और विपक्षी दलों ने भी हालात को देखते हुए अयोध्या में सेना तैनात करने की मांग की है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या में उमड़ने वाले जनसैलाब को लेकर कहा था कि, लोग डरे हुए हैं और कोई बड़ी अनहोनी न हो इसके लिए सेना को लगा देना चाहिए और सुरक्षा की जिम्मेदारी उसे देना चाहिए।

इतना ही नहीं यूपी के कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने कहा, ‘मुख्यमंत्री तो चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जबकि यहां फैजाबाद (अयोध्या) में धारा 144 लगी है। जिस तरह से यहां भीड़ इकट्ठा हो रही है ऐसे में अगर कुछ भी होता है तो उसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होगी। उन्होंने कहा कि चूंकि अयोध्या में धारा-144 लगी है लेकिन फिर लोग वहां इकट्ठा हो रहे हैं तो साफ है कि प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। इसीलिए सेना को ही बुलाया जाना चाहिए।

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