Friday, September 17, 2021

 

 

 

पुलिसवाले ने दलित को मारी गोली, पिता से बोला – मुस्लिम का नाम लेना, 10 लाख मिलेंगे

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यूपी के मुजफ्फरनगर स्थित गोडला गांव में रहने वाले सुरेश कुमार (60) के बेटे अमरेश को 2 अप्रैल, 2018 को भारत बंद के दौरान गोली मारी गई थी। इस बारे में पीड़ित पिता ने बड़ा खुलासा किया है। इस घटना में उनके बेटे की मौत हो गई।

पेशे मजदूर सुरेश ने बताया कि ‘ उनका बेटा भी उनकी तरह दिहाड़ी मजदूर था और शहर में काम की तलाश में गया था। काम नहीं लगा तो मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर आ गया, जहां जाटव लड़के प्रदर्शन कर रहे थे।’ सुरेश कहते हैं, ‘हमारे लड़कों ने बताया कि उसे एक पुलिस अधिकारी ने सीने पर गोली मारी थी। प्रदर्शनकारी इसे हाथ से चलने वाले ठेले पर सरकारी हॉस्पिटल में लेकर गए, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।’

सुरेश ने दावा किया बेटे की मौ’त का आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर उन्हें न्यू मंडी पुलिस स्टेशन उठाकर ले आया। सुरेश कहते हैं, ‘उन्होंने मुझसे बेटे के हत्यारे के संदिग्ध के रूप में किसी भी मुस्लिम शख्स का नाम लेने को कहा। कहा गया कि अगर मैं ऐसा करता हूं तो इसके बदले में मुझे दस लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा। मैंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं शांति चाहता हूं तो किसी का तो नाम लेना ही पड़ेगा। इस पर मैंने उस पुलिसवाले कहा कि मैं जानता हूं कि तुमने ही मेरे बेटे को मारा है।’

सुरेश आगे कहते हैं, ‘मेरे इनकार के बाद मुझे जातिगत गालियां दी गई, बाहरी व्यक्ति कहा गया। मुझे पीटने की धमकी दी गईं। मैंने उसे चेतावनी दी कि उसकी शिकायत करुंगा। इसके बाद पुलिस ने एक दलित युवक राम शरण को उस हिंसा के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जिसमें अमरेश की मौ’त हुई।’

सुरेश आगे कहते हैं, ‘मैं अपने बेटे के लिए इंसाफ की लड़ाई नहीं लड़ सकता। हमारे किसी पड़ोसी ने भी हमारी मदद नहीं की।’ सुरेश की एक बेटी और दो बेटे और हैं, जो दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। उन्हें सरकार ने किसी तरह का मुआवजा नहीं दिया।

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