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भारत के दूसरे सबसे बड़े राष्ट्रीयकृत बैंक पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई स्थित एक शाखा में हुए 1.8 अरब अमेरिकी डॉलर के घोटाले को दबाने की कोशिश की जा रही है. इस बारे में भ्रम फैलाया जा रहा है कि ये घोटाला पिछली यूपीए सरकार की देन है जबकि ऐसा नहीं है. ये घोटाला मोदी सरकार में ही हुआ है.

इस बात का खुलासा घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की रिपोर्ट में हुआ है. FIR में CBI ने कहा है कि लगभग 5000 करोड़ रुपये के LOU (Letters of Undertaking) साल 2017 में जारी किये गये. साथ ही अनेक देशी और विदेशी बैंको के नाम सामने आये हैं जिन्होंने पीएनबी के कहने पर घोटालेबाजों के लिए विदेशों में पैसे अदा किए.

मामले में 31 जनवरी को दर्ज की गई पहली एफआईआर में बताया गया है 2017 में 8 एलओयू के जरिये 280.7 करोड़ की हेराफेरा हुई. एफआईआर में सीबीआई ने बुधवार को पीएनबी की तरफ से दी गई जानकारी जोड़ी और पहली एफआईआर में कुल नुकसान 6,498 करोड़ का बताया. हर तरह से जोड़कर पीएनबी को हुआ नुकसान 11400 करोड़ का बैठा.

सीबीआई ने यह भी कहा कि जब से मामले के आरोपी नीरव मोदी और उनके रिश्तेदार एलओयू को रिन्यू करवाकर हेराफेरी कर रहे थे, उस दौरान 2017 में कई पुराने एलओयू भी रिन्यू कर दिए गए. सीबीआई ने मामले में शुक्रवार को पीएनबी के चार अधिकारियों से पूछताछ की। इन अधिकारियों के द्वारा 2014 से लेकर 2017 के बीच मोदी और उनकी कंपनियों के बीच डील कराने को लेकर जांच की जा रही है.

इस मामले में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि यदि घोटाले की सभी परतें खोली जाएंगी, तो यह 30,000 करोड़ का निकलेगा. उन्होंने तंज करते हुए मोदी सरकार ने “उड़ान” योजना को नई परिभाषा देते हुए कहा इसमें “हर घोटालेबाज बिना रोकटोक के देश से भाग सकता है.”

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