दिल्ली के विज्ञान भवन में इस्लामिक विरासत पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की और से दी गए बयान पर मुस्लिम उलेमाओं ने सवाल किया कि आखिर कब मुस्लिम युवाओं के हाथों में कंप्यूटर होगा.

ध्यान रहे पीएम मोदी ने जॉर्डन किंग अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन समेत देश के कई इस्लामिक नेता की मौजूदगी में कहा कि हमारे युवा एक तरफ मानवीय इस्लाम से जुड़े हों और दूसरी ओर आधुनिक विज्ञान और तरक्की के साधनों का इस्तेमाल भी करे.

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उन्होंने कहा, भारत की विरासत और मूल्य, हमारे मज़हबों का पैगाम और उनके उसूल ही वह शक्ति है जिनके बल पर हिंसा और दहशतगर्दी जैसी चुनौतियों को पार कर सकते हैं.

इस बारें में गुजरात से मौलाना सैयद जमी अशरफ ने कहा कि उन्हें पीएम की बातों पर पूरी तरीके से इत्तेफाक है. लेकिन उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब गुजरात में मोदी सीएम थे तब भी ऐसी बातें उन्होंने कही थी. वो अब पीएम बन गए हैं, चार साल हो गए हैं,लेकिन कंप्यूटर कब मिलेगा जिसका युवाओं को इंतजार है.

जमीयत उलेमा ए हिन्द के कार्यकारिणी सदस्य डॉक्टर सईदुद्दीन काजमी ने पीएम के इस बयान को जमीयत के भी विजन का हिस्सा बताया और कहां कि उनकी संस्था इसी दिशा में काम कर रही है.

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