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एक साल पहले अपने विदाई समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में खुद पर की गई टिप्पणी को पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने परंपरा के विरुद्ध बताते हुए कहा कि विदाई कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिया भाषण प्रचलित परिपाटी के काफी अलग था।

पीटीआई-भाषा को दिए इंटरव्यू में पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, प्रधानमंत्री इसमें (फेयरवेल) शामिल हुए, और मेरी पूरी तारीफ करने के दौरान उन्होंने मेरे दृष्टिकोण में एक निश्चित झुकाव के बारे में भी संकेत दिया। उन्होंने मुस्लिम देशों में राजनयिक के तौर पर मेरे पेशेवर कार्यकाल और कार्यकाल खत्म होने के बाद अल्पसंख्यक संबंधी सवालों की चर्चा की।

बता दें 10 अगस्त, 2017 अंसारी का बतौर उप राष्ट्रपति (2007-2017) दूसरे कार्यकाल और राज्यसभा के सभापति का अंतिम दिन था। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा था, ‘पिछले दस सालों में आपकी जिम्मेदारी बदली है और आपको खुद को केवल संविधान तक सीमित रखना पड़ा है। इससे आप अंदर ही अंदर आंदोलित हुए होंगे। लेकिन आज से आपको मन की बात बोलने की आजादी होगी। अब से आप अपनी सोच के मुख्य दायरे के आधार पर सोच, बोल और काम कर सकते हैं।’ ‘आपने कई जिम्मेदारियां निभाई हैं और आप ‘खास’ दायरे में रहे हैं। इसीलिए आपकी कुछ खास राय और देखने का नजरिया है।’

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हामिद अंसारी ने अपनी नई किताब ‘डेयर आई क्वेश्चन’ में बताया है कि  ‘संभवत: यह, मेरे बेंगलुरु में दिए भाषण के संदर्भ में था, जिसमें मैंने ‘असुरक्षा की बढ़ती आशंका’ के बारे में कहा था। साथ ही अपने दिए टीवी इंटरव्यू में भी इसका जिक्र किया था कि मुस्लिमों और कुछ अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के मन में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

हामिद अंसारी का यह भी मानना है कि बहुसंख्यकों में स्वीकार्य राष्ट्रवाद के विचार और भारतीय को अब एक विचारधारा से चुनौती मिल रही है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार के जरिए विशिष्टता के शुद्धिकरण का चित्रण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार में संस्कृति को बहुत संकीणर्ता से परिभाषित किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद पर बहस का भारतीय लोकतंत्र पर व्यापक असर हुआ है। उनका कहना है कि राष्ट्रवाद पर चर्चा करना भारतीय लोकतंत्र के लिए व्यापक विद्रोह है।

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