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बैंकों को करोड़ों का चूना लगाकर भारत से फरार आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 देशों से अपील की है।

अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में चल रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने आर्थिक अपराध कर भाग जाने वाले भगौड़ों पर शिकंजा कसने के लिए 9 सूत्री एजेंडा पेश किया। साथ ही सम्मेलन से पहले ब्रिक्स नेताओं के साथ बैठक में मोदी ने ब्रिक्स के सदस्य देशों से आर्थिक अपराधियों और भगोड़े के खिलाफ मिलकर काम करने का आह्वान किया।

मोदी ने कहा, “वित्तीय घोटालेबाजों और भगोड़ों के खिलाफ भी मिलकर काम करने की जरूरत है। यह समस्या वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बन सकती है।” जिसके बाद भारत ने आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जी 20 सम्मेलन में 9 प्वाइंट्स का एजेंडा पेश किया।

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प्रधानमंत्री ने जी-20 देशों से ऐसे भगौड़ों से निपटने के लिए एक ऐसा ढांचा तैयार करने की अपील की जिससे कि ऐसे आर्थिक अपराधियों के लिए भागकर विदेश में छिप जाना आसान न रहे। इस दौरान पीएम ने कहा, ‘अपराध होने से रोकना, अपराधियों की जल्दी वापसी और अपराध की आय के प्रत्यावर्तन जैसी कानूनी प्रक्रियाओं में सहयोग को बढ़ाया और सुव्यवस्थित किया जाना चाहिए’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘यूएनसीएसी (United Nations Convention Against Corruption) और यूएनओटीसी (United Nations Convention Against Transnational Organized Crime) के अंतरराष्ट्रीय सहयोग संबंधी सिद्धातों को पूर्ण और प्रभावी रूप से लागू किया जाना चाहिए’

भारत ने यह भी सुझाव दिया कि इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढावा देने के लिए एक वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (FATF) का गठन किया जाना चाहिए जोकि सक्षम प्राधिकरणों और वित्तीय खुफिया इकाइयों को समय रहते जानकारी उपलब्ध कराए ताकि कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

एजेंडे के मुताबिक, ‘एफएटीएफ को भगोड़ा आर्थिक अपराधियों की मानक परिभाषा तैयार करने के लिए कार्य करना चाहिए। इसके अलावा एफएटीएफ को जी-20 देशों को घरेलू कानून के तहत, भगोड़ा आर्थिक अपराधियों की पहचान, प्रत्यर्पण और न्यायिक कार्यवाही से संबंधित प्रक्रियाओं से निपटने के मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने के लिए मानकीकृत प्रक्रियाओं का एक सेट भी विकसित करना चाहिए।’

इसके अलावा भारत ने प्रत्यर्पण के सफल मामलों सहित अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक साझा मंच की स्थापना की भी वकालत की। यह भी कहा गया कि जी -20 फोरम को ऐसे आर्थिक अपराधियों की संपत्ति का पता लगाने पर काम शुरू करने पर विचार करना चाहिए, जिनके सिर पर उनके देश में भारी कर्ज है, ताकि वसूली की जा सके।

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