Narendra Modi, India's prime minister, speaks during the 37th Singapore Lecture held at the Shangri-La Hotel in Singapore, on Monday, Nov. 23, 2015. Modi's government, which in February pushed back its deadline for fiscal consolidation by a year to March 2018, faces a higher wage bill just as a sluggish economy and dwindling asset sales are weighing on revenue. Photographer: Nicky Loh/Bloomberg via Getty Images

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को एक किसान रैली को संबोधित करने कर्नाटक के बेलगाम पहुंचे. अपने संबोधन के दौरान पीएम ने भ्रष्टाचार के मामले पर विपक्ष को जमकर ललकारा. साथ ही उन्होंने मौजूदा वक्त में भारत पर दुनिया की उम्मीदों को उजागर किया. इस दौरान फसल बीमा योजना का विरोध कर रहे कुछ किसान भी रैली स्थल पर पहुंचे, जिन्हें पहले ही रोक लिया गया.

प्रधानमंत्री मोदी ने कर्नाटक के बेलगाम में किसानों की रैली में कहा कि अगर विश्व अर्थव्यवस्था में कोई आशा की किरण है, तो वह भारत है. हमें नदियों को एक दूसरे से जोड़ने के बारे में सोचना होगा, जल प्रबंधन इस समय की जरूरत है. पीएम के साथ बीजेपी विधायक और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी मौजूद थे.

सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं
कर्नाटक के बेलगाम में किसानों की रैली को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार रोकने को लेकर सरकार की पीठ थपथपाई. मोदी ने कहा कि जब मुझे सत्ता मिली, तब देश काफी परेशान था.

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जल, थल और नभ हर जगह भ्रष्टाचार था, लेकिन हमने सत्ता संभालते ही स्थिति को सुधारने का काम किया. मोदी ने कहा कि हमारे विरोधी भी जो सुबह-शाम बेवजह के मुद्दों पर बयान देते हैं, उन्होंने भी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया.

भारत विश्व के लिए आशा की किरण
रैली के दौरान फसल बीमा योजना का विरोध कर रहे किसान भी रैली स्थल पर पहुंचे, जिन्हें पहले ही रोक लिया गया.

पीएम ने कहा कि जब हमें सत्ता मिली थी, भारत आर्थिक संकटों से गुजर रहा था, हर तरह से देश में आर्थिक स्थिति बेहाल होती जा रही थी. ऊपर से भ्रष्टाचार भारत को दीमक की तरह तबाह कर रहा था. एक निराशा का माहौल था, लेकिन आज पूरे विश्व में यह चर्चा हो रही है कि आज अगर कोई आशा की किरण है, तो वह हिंदुस्तान है.

डेढ़ साल में मुसीबतों से देश को निकाला बाहर
मोदी ने किसानों की इस रैली में वैश्विक मंदी के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का रोडमैप भी पेश किया. मोदी ने कहा कि सारी दुनिया में आर्थिक स्थिति डांवाडोल है, दुनिया के महारथी देश भी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. लेकिन भयंकर मंदी का माहौल होने के बाद भी एक अकेला हिंदुस्तान तेज गति से विकास कर रहा है.

विरासत में हमें आर्थिक संकट के सिवाय कुछ नहीं मिला था, लेकिन हमने डेढ़ साल में सब मुसीबतों से देश को बाहर निकाला है. इस देश को आने वाले दिनों में अगर विकास की गति बनाए रखनी है, संकट में भी रफ्तार बनाए रखनी है, तो विकास की यात्रा को तीन आर्थिक पिलरों पर खड़ा करना होगा. वह तीन पिलर हैं, ‘मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और सर्विस सेक्टर.’

किसानों के लिए दुरुस्त सिंचाई व्यवस्था
पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों के बीच फसल बीमा योजना और मृदा कार्ड जैसी योजनाओं को भी जमकर सराहा. पीएम ने कहा कि किसानों के लिए सिंचाई की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए हमने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना बनाई है. 50 हजार करोड़ रुपए की लागत से यह योजना काम करेगी. नदियों को जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है. इस्राइल उदाहरण है कि कम से कम पानी में कृषि क्रांति कैसे हो, यह काम इस्राइल ने करके दिखाया है.

जल प्रबंधन है जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि हमें एक-एक बूंद पानी की कीमत समझनी होगी. पानी कारखाने में पैदा होने वाली चीज नहीं है, पानी तो भगवान का प्रसाद है. किसी तीर्थ में प्रसाद गिर जाए, तो माफी मांग कर उठा लेते हैं. मोदी ने कहा, ‘हमारे देश मे अगर आजादी के बाद जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई होती, तो आज सूखे की मार से किसानों को आत्महत्या नहीं करनी पड़ती. किसान को अगर पानी मिल जाए, तो वह मिट्टी से सोना निकाल देगा.’

मनरेगा में सिंचाई योजनाओं का काम
पीएम मोदी ने कहा कि मनरेगा को गड्ढे खोदने के लिए पैसे बर्बादी का जरिया नहीं होना चाहिए. मनरेगा के काम में पहली प्राथिमकता नहरों को बनाने, तालाब खोदने और चेक डैम बनाने की रहेगी. ड्रॉप, मोर क्रॉप का मंत्र देते हुए पीएम ने कहा कि जितना महत्व जल संचय का है, उतना ही जल सिंचन का भी है. पीएम ने कहा, ‘हमने किसानों के लिए जल और जमीन की चिंता कम की है. हमने मृदा स्वास्थ्य कार्ड की योजना चलाई है. जमीनों के सैंपल लेकर लैबोरेटरी में टेस्ट किए जा रहे हैं.’ (Aaj Tak)

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