Saturday, July 31, 2021

 

 

 

सीएए विरोधी ‘पिंजड़ा तोड़’ की लड़कियां को पहले जमानत फिर गिरफ्तारी

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CAA विरोधी मुहिम की दो महिला कार्यकर्ताओं को पूर्वोत्तर दिल्ली के जाफराबाद पुलिस स्टेशन की एक टीम द्वारा गिरफ्तार किए जाने के एक दिन बाद फिर से दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। दरअसल, इससे पहले दोनों को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी थी। हालांकि फिर से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सांप्रदायिक हिंसा वाले मामले में मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट अजीत नारायण ने नताशा नरवाल और देवांगाना कालिता को जैसे ही ज़मानत देने का फ़ैसला सुनाया, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के एक जांच अधिकारी ने अदालत में नई अर्जी दाखिल की जिसमें दंगों से जुड़े क़त्ल के एक दूसरे मामले में उनकी गिरफ़्तारी और पूछताछ के लिए मंज़ूरी मांगी गई थी।

इससे पहले अदालत ने दोनों को यह कहते हुए जमानत दे दी कि उनपर लगाई गई आईपीसी की धारा 353 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल) मेंटेनेबल नहीं है और वे केवल एनआरसी (NRC) और सीएए (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थीं।

पुलिस का दावा है कि दो महिलाएं, देवांगना कालिता (30) और नताशा नरवाल (32), उन लोगों में शामिल थीं, जिन्होंने 22-23 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे एक एंटी-सीएए प्रोटेस्ट और रोड नाकाबंदी का आयोजन किया था। इस प्रोटेस्ट के बाद 23 फरवरी को बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और उनके समर्थकों ने सीएए के समर्थन में रैली की। इसके एक दिन बार पूरे नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में दंगे भड़क गए थे।’

महिलाओं को स्पेशल सेल, जाफराबाद पुलिस स्टेशन और क्राइम ब्रांच SIT द्वारा तीन जांच का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को नरवाल से स्पेशल सेल के अधिकारियों द्वारा पूछताछ की जा रही थी जब जाफराबाद स्टेशन के अधिकारियों ने उसे उसके निवास से गिरफ्तार किया। जाफराबाद पुलिस स्टेशन की टीम ने उन्हें आईपीसी की धारा 186 और 353 के तहत गिरफ्तार किया। हालांकि, रविवार को उन्हें जमानत देते हुए, ड्यूटी मजिस्ट्रेट अजीत नारायण ने कहा कि “एफआईआर और केस फाइल के बहाने से, प्रथम दृष्टया धारा 353 के तहत अपराध बनाए रखने योग्य नहीं है।”

आदेश में कहा गया है “मामले के तथ्यों से पता चलता है कि आरोपी केवल एनआरसी और सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और आरोपी किसी भी हिंसा में शामिल नहीं थे। साथ ही, अभियुक्तों की समाज में मजबूत जड़ें हैं और वे शिक्षित हैं। अभियुक्त जांच के संबंध में पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं।”

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