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अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ की ओर से पेश हुए वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता कपिल सिब्‍बल की दलीलों को अब सभी याचिकाकार्ताओं समेत सुन्नी वक्फ बोर्ड ने समर्थन दिया है.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जुलाई 2019 तक टालने की सिब्बल की दलील का हाजी महबूब नामक शख्स ने खुद को सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ का सदस्य बताते हुए विरोध किया था.

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जी महबूब ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा था, ‘हां कपिल सिब्बल हमारे वकील हैं लेकिन वो एक राजनीतिक दल से भी संबंध रखते हैं. मंगलवार (5 दिसंबर) को सुप्रीम कोर्ट में दिया गया उनका बयान गलत है. हम इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द चाहते हैं.

अब इस सबंध में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा, हाजी महबूब न तो सुन्नी वक्फ बोर्ड के सदस्य हैं और न हीं वह किसी अधिकार से बोर्ड का प्रतिनिधित्व करते हैं. हाजी महबूब इस मामले में एक कई वादियों में से एक वादी हैं, जिसने बुधवार को सिब्बल की याचिका से असहमति जताई थी.

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के सदस्य जफरयाब जिलानी ने  कहा, सर्वोच्च न्यायालय में कपिल सिब्बल साहेब ने जो कुछ भी कहा, वह सोच-विचार कर और हमें विश्वास में लेने के बाद कहा. हम उनके रुख का पूरा समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि यह महबूब का व्यक्तिगत विचार हो सकता है, लेकिन यह इस मामले से जुड़े किसी भी पक्ष का आधिकारिक रुख नहीं है.

मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के एक वकील शकील अहमद ने कहा, “हाजी महबूब का उनके मुवक्किल से कोई संबंध नहीं है और वह सिर्फ एक अन्य वादी हैं.” वही एआईएमपीएलबी के अध्यक्ष मौलाना वली रहमानी ने आईएएनएस से कहा, “हम सर्वोच्च न्यायालय में कपिल सिब्बल की दलील से पूरी तरह सहमत हैं। मामले की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव तक टाल देनी चाहिए.”