देश में शरिया अदालतों के गठन को असंवैधानिक घोषित करने की मांग करते हुए एक महिला ने सर्व्वोच अदालत में याचिका दायर की है।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चन्द्रचूड़ की पीठ के समक्ष दायर की गई इस याचिका में मुसलमानों में व्याप्त बहुविवाह और निकाह-हलाला के मामले में चल रही सुनवाई में पक्षकार बननेकी भी बात कहीं गई।

याचिककर्ता की इस मांग पर कोर्ट ने नए सिरे से अर्ज़ी दायर करने का आदेश दिया। बता दें इस मामले में कोर्ट 26 मार्च को पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन कर चुकी है।

जिकरा ने अपनी याचिका में कहा कि धारा 498ए के तहत तीन-तलाक को क्रूरता जबकि निकाह हलाला, निकाह मुताह और निकाह मिस्यार को धारा 375 के तहत बलात्कार घोषित किया जाए। साथ ही उसने कहा, बहु-विवाह भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत अपराध है जबकि भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ निकाह-हलाला और बहु-विवाह की अनुमति देता है.

जिकरा ने अपनी अर्ज़ी में तीन तलाक, निकाह हलाला और अन्य कानूनों तथा परंपराओं के हाथों अपनी प्रताड़ना की बात कही है। महिला को दो बार तलाक का सामना करना पड़ा और अपने ही पति से निकाह करने के लिए निकाह-हलाला से गुज़रना पड़ा।

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