श्रीनगर | शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक विडियो ट्वीट कर सेना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए. इस विडियो में दिखाया गया की सेना ने पत्थरबाजो से बचने के लिए एक व्यक्ति को ढाल के रूप में अपनी जीप के सामने बाँधा हुआ है. विडियो सामने आने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक दलों ने इसकी निंदा की है.

विडियो में जिस शख्स को जीप के आगे बाँधा गया है उसकी पहचान उजागर हो चुकी है. यह शख्स बडगाम जिले का रहने वाला है और इसकी पहचान फारुक अहमद डार के रूप में हुई है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर अनुसार, 26 वर्षीय फारुक ने बताया की उस दिन सेना ने उसे अपनी जीप के सामने बांधकर करीब 9 घंटे परेड कराई. इस दौरान उसे उटलीगाम से सोनपा, नजान, चाकपोरा, हांजीगुरु, रावलपोरा, खोसपोरा और अरिजल में करीब 25 किलोमीटर घुमाया गया.

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फारुख ने बताया की वो कोई पत्थरबाज नही है बल्कि एक शाल बुनकर है जो कभी कभी बढईगिरी का काम करता है. उधर फारुक के भाई फयाज ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए बताया की उस दिन फारुक बीरवाह के गमपोरा स्थित हमारी बहन के ससुराल गया हुआ था. वहां बहन के ससुराल में किसी रिश्तेदार की मौत हो गयी थी. जब फारुक वहां से लौट रहा था तो सेना ने उसे रास्ते में रोक लिया.

फयाज के अनुसार सेना ने उसके भाई को पीटा और उसकी मोटरसाइकिल में भी तोड़ फोड़ की गयी. इसके बाद उसे सेना ने अपनी जीप के सामने बांध दिया और उसके सीने पर एक पोस्टर लगा दिया जिस पर लिखा था’ मैं पत्थरबाज हूँ’. पुलिस ने हमारी शिकायत नही सुनी. इसके बाद हम अरिजल आर्मी कैंप पहुंचे. इसके बाद सेना ने फारुक को रिहा कर दिया लेकिन उसका मोबाइल और मोटरसाइकिल अभी तक नही दी गयी है.

उधर सेना ने इस कार्यवाही का बचाव करते हुए कहा की 9 अप्रैल को पोलिंग बूथ पर हिंसा की सूचना मिलने के बाद राष्ट्रीय राइफल कंपनी की एक टुकड़ी बूथ के लिए रवाना हुई. सेना की 5 गाडियों को भीड़ से सुरक्षित निकालने के लिए एक शख्स को जीप के आगे बांधा गया. अभियान के पूरा होते ही शख्स को पुलिस को सौप दिया गया. फिलहाल पुरे मामले पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने रिपोर्ट तलब की है.

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