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सूफी फेडरेशन ऑफ इंडिया की एक बैठक नई दिल्ली स्थित कार्यालय पर आयोजित की गई। जिसमें ईद ए मिलादुन्नबी को आलमी अशरा अमन के तौर पर मनाने की बात पर जोर दिया गया। साथ ही बैठक में केंद्र सरकार के कौमी एकता सप्ताह मनाने के फैसले का स्वागत भी किया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए सूफी फेडरेशन ऑफ इंडिया के मुख्य संयोजक औऱ मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन भारत सरकार के सदस्य सैयद बाबर अशरफ ने कहा कि नबी करीब (सल्ल.) ने दुनिया में अमन के साथ रहने, एक दूसरे के दुख-सुख में भागीदार बनने सहित इंसानों की भलाई का संदेश दिया। पैगंबर मोहम्मद (सल्ल.) का सबसे बड़ा संदेश पूरी दुनिया में अमन कायम करना रहा। ईद-ए-मिलादुन्नबी के मौके पर पैगंबर मोहम्मद (सल्ल.) के संदेश को लोगों के बीच आम करते हुए अमन का संदेश दिया जाए।

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बाबर अशरफ ने कहा कि दुनिया में शांति रहे यही इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद (सल्ल.) का मकसद रहा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कौमी एकता सप्ताह मना रही है. उन्होंने कहा कि हमें ना सिर्फ हिन्दू, सिख, ईसाई और दूसरे धर्मों के साथ मोहब्बत कायम करना चाहिए, बल्कि खुद पहल कर पैगंबर मोहम्मद (सल्ल.) के अमन के संदेश को आगे बढ़ाना चाहिए.

सूफी फेडरेशन ऑफ इंडिया के मुख्य संरक्षक हजरत सैयद मोहम्मद जिलानी अशरफ ने कहा कि मुल्क में अमन और शांति रहे यही सबकी कोशिश होनी चाहिए. क्योंकि मुल्क में अमन और शांति से ही मुल्क के साथ साथ यहां की आवाम का विकास होगा.

उन्होंने कहा कि बिना अमन कायम किए, बिना भाई चारा कायम किए दुनिया की कोई भी ताकत आगे नहीं बढ़ सकती है. उन्होंने कहा कि इस्लाम की सच्ची सीख भी यही है कि दुनिया में अमन कायम किया जाए और भाई चारे को बढ़ावा दिया जाए. बैठक के अंत में मुल्क में अमन और शांति के लिए दुआ की गई.

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