श्रीनगर | वादी के युवाओ को भारत के खिलाफ भड़काकर उनसे आन्दोलन करवाने वाले हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता, यही रुख अपने बच्चो के लिए नही अपनाते. कश्मीर के बच्चे और अपने बच्चो के लिए अलगावादी नेता दोहरा रवैया रखते है. अपने बच्चे सुरक्षित रहे, विदेशो में अच्छी शिक्षा ले और वापिस कश्मीर लौटकर अच्छे वेतन पर सरकारी नौकरी करे. लेकिन कश्मीर के युवा इनकी राजनीती के भेंट चढ़ जाए.

अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार पिछले साल जब घाटी में हिंसक आन्दोलन चल रहे थे, युवाओं की लाशे उठ रही थी उस समय सूबे की पीडीपी-बीजेपी सरकार , हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के पोते को सारे नियम कायदे ताक पर रखकर नौकरी दे रहे थे. पाकिस्तान परस्त माने जाने वाले गिलानी के पोते को नौकरी देने की आखिर इतनी क्या जल्दबाजी थी की आन्दोलन शांत होने का भी इन्तजार नही किया गया.

अख़बार ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया की पीडीपी-बीजेपी सरकार ने गिलानी के पोते अनीस उल इस्लाम को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कांफ्रेंस सेंटर (SKICC) में बतौर रिसर्च ऑफिसर नियुक्त किया है. अख़बार का यह भी दावा है की इसके लिए सरकार ने राज्य की भर्ती एजेंसीज को भी इसकी सूचना नही दी. जबकि इस तरह की भर्ती पब्लिक सर्विस कमीशन और राज्य अधीनस्थ चयन बोर्ड के जरिये की जाती है.

रिसर्च ऑफिसर नियुक्त होने के बाद अनीस को करीब एक लाख रूपए वेतन मिलेगा इसके अलावा पेंशन जैसी सुविधाए भी दी जायेंगी. अख़बार ने SKICC के एक अधिकारी के हवाले से बताया की पर्यटन सचिव फारुख शाह ने अनीस की नियुक्ति की. उन्होंने पहले ही अनीस को नियुक्त कर लिए था क्योकि वो सिलेक्शन बोर्ड के चेयरमैन थे. हालाँकि फारुख ने इसका खंडन करते हुए कहा की हमें 140 आवेदन मिले थे और इंटरव्यू के बाद अनीस को चुनाव गया.

हालाँकि आवेदन करने वाले काई अभियार्थियो ने दावा किया है की उनको इंटरव्यू के लिए कॉल नही की गयी. सैयद शाह गिलानी के पोते अनीस को पाक साफ़ उम्मीदवार नही माना जाता. साल 2009 में अनीस ने पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया था लेकिन सीआईडी की रिपोर्ट पर उनका पासपोर्ट इशू नही किया गया. बाद में हाई कोर्ट के आदेश पर उनका पासपोर्ट जारी किया गया.

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