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नई दिल्ली | नोट बंदी के बाद अगर किसी कंपनी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है, वो है पेटीएम्. नोट बंदी के अगले दिन पेटीएम् के कारोबार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला. पेटीएम् की और से जारी अधिकारिक बयान में कहा गया की उन्होंने नोट बंदी के बाद , एक ही दिन में 1.5 अरब रूपए का कारोबार किया. हालांकि इसी बीच पेटीएम् के साथ एक विवाद भी जुड़ गया. पेटीएम् ने नोट बंदी के अगले दिन प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ विज्ञापन दे दिया. जिसकी काफी आलोचना हुई.

नोट बंदी के बाद प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों को कैशलेस इकॉनमी के फायदे समझा रहे है और लोगो को इसे अपनाने ने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे है. लेकिन डिजिटल बैंकिंग या पेमेंट कितना सुरक्षित है यह कहना काफी मुश्किल है. इसी बीच खबर आई है की ई-वालेट कंपनी पेटीएम् ने दावा किया है की उसके साथ 6.15 लाख धोखाधड़ी हुई है. 48 ग्राहकों ने उसके साथ यह धोखाधड़ी की है.

पेटीएम् की शिकायत पर सीबीआई ने ऍफ़आईआर दर्ज कर ली है. पेटीएम के लीगल मैनेजर एम. शिवकुमार की और से दर्ज एफआईआर में बताया गया की जब किसी ग्राहक को कोई उत्पाद पसंद नही आता है तो उससे उत्पाद वापिस मंगाकर पैसा रिफंड कर दिया जाता है. लेकिन 48 मामलो में ऐसा नही हुआ . 48 ग्राहकों को तब भी पैसा रिफंड कर दिया गया जबकि न तो उन्होंने उत्पाद वापिस किया और न ही उत्पाद पसंद न आने की शिकायत दर्ज की.

पेटीएम् ने बताया की इससे कंपनी को 6.15 लाख रूपए का चुना लगा है. उधर इस मामले में सीबीआई ने दिल्ली के कालकाजी, गोविंदपुरी और साकेत निवासी 15 लोगों और कंपनी के ही कुछ अनाम अधिकारियो के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. चूँकि सीबीआई तब तक इस तरह के मामले नही देखती जब तक केंद्र सरकार की तरफ से या सुप्रीम कोर्ट , हाई कोर्ट की तरफ से ऐसा निर्देश न मिले. इसलिए इस पर राजनीती भी तेज हो गयी है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इस पर तंज कसते हुए कहा की जब मोदी जी पेटीएम् के ऐड में आ गए तो मोदी सरकार भी पेटीएम् की जेब में है. सीबीआई की हिम्मत नही की पेटीएम् के आदेश न माने.


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