गोरखपुर | गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 63 बच्चो की मौत ने पुरे देश को हिलाकर रख दिया है. राज्य सरकार की असंवेदनशीलता और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से कई परिवारों के चिराग बूझ गए. मीडिया रिपोर्ट्स और पीडितो के परिजनों के अनुसार अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी होने के वजह से बच्चो की मौत हो गयी, लेकिन न ही सरकार और न ही अस्पताल प्रशासन इस बात को मानने के लिए तैयार है.

जिन परिजनों ने अपने बच्चो को अपनी आँखों के सामने दम तोड़ते देखा उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर कई गंभीर सवाल उठाये है. इसके अलावा सरकारी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है. पीड़ित परिजनों का कहना है की अस्पताल में कोई भी इंतजाम नही है. न ही दवाई और न ही खून की कोई व्यवस्था. परिजनों के अनुसार अस्पताल में सीरिंज और रुई तक भी नही है. इनको भी परिजनों को बाहर से खरीदकर लाना पड़ता है.

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अपनी आप बीती सुनाते हुए एक परिजन ने बताया की पहले हम अपने बच्चो के लिए खून, सीरिंज और गुल्कोज के लिए धक्के खा रहे थे और बाद में अपने बच्चो के शव के लिए. बिना पोस्टमार्टम किये हमें हमारे बच्चे सौप दिए गए. इसके अलावा मृत्यु प्रमण पत्र पर भी मृत्यु के कारणों का जिक्र नही किया गया. एक 30 वर्षीय किसान ब्रह्मदेव ने बताया की उन्होंने अपने जुड़वाँ बच्चो को अस्पताल में भर्ती कराया था. 7 अगस्त को आईसीयु के बाहर लगे ऑक्सीजन लेवल में ऑक्सीजन की मात्र कम दिखाई दे रही थी.

मैंने इसकी शिकायत अस्पताल प्रशासन से भी की लेकिन उन्होंने इसको अनुसार कर दिया. उस समय मुझे अंदेशा हुआ की कुछ गलत हो रहा है. इसके बाद डॉक्टर ने मुझे बच्चो के लिए खून का इंतजाम करने के लिए कहा. इसके अलावा दवाई, रुई और गुल्कोज इंजेक्शन के लिए भी मुझे दौड़ भाग करनी पड़ी, वो भी अस्पताल प्रशासन उपलब्ध नही करा सका. मैंने ब्लड बैंक जाकर खून का इन्तजाम किया.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए ब्रह्मदेव ने कहा की मुझे उस समय किसी गड़बड़ का अहसास हुआ जब डॉक्टर बच्चो को अम्बु बैग से ऑक्सीजन देते हुए दिखाई दिए. 9 अगस्त को मेरे बेटे की मौत हो गयी, उसी दिन चार और बच्चो की मौत हुई. हमें यह भी नहीं बताया गया की मेरे बेटे की मौत किन कारणों से हुई. इसके अलावा पोस्टमार्टम भी नही किया गया. इसके बाद 10 अगस्त को मेरी बेटी ने भी दम तोड़ दिया. मौत से पहले मैंने उसके मूंह से खून निकलते देखा.

ब्रह्मदेव ने बताया की अस्पताल में कोई व्यवस्था नही है. पहले हम दवाई के लिए भाग दौड़ कर रहे थे और बाद में पोस्टमार्टम और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए. हमें आईसीयु में नही घुसने दिया जा रहा था. हम कोई सवाल भी नही पूछ सकते थे. मेरे पास प्राइवेट अस्पताल में बच्चो को भर्ती कराने के पैसे नही थे इसलिए मैंने बीआरडी अस्पताल में उनको भर्ती कराया गया. लेकिन यहाँ भी कुछ मुफ्त नही था.

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