Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

जापानी पत्र‍िका ने की मोदी की आलोचना – ‘ह‍िंदुत्‍व के लिए अर्थव्‍यवस्‍था को पंगू बना दिया’

- Advertisement -
- Advertisement -

जापान की आर्थिक पत्रिका एशियन निक्केई ने अपने एक लेख में देश की आर्थिक स्थिति को लेकर मोदी सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने हिंदुत्व के एजेंडे को पूरा करने के लिए अर्थव्‍यवस्‍था को पंगू बना दिया है।

लेख में कहा गया कि मोदी सरकार आर्थिक चुनौतियों से निपटने के बजाए हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने में लगी है। लेख में लिखा गया है, ‘जनादेश का इस्तेमाल आर्थिक चुनौतियों से निपटने में करने की बजाय मोदी सरकार ने हिंदुत्व के एजेंडे को दोहरा कर दिया। हिंदुत्व को ही देश की पहचान के केंद्र में रखने की कोशिश करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म किया गया और नागरिकता कानून में संशोधन किया गया।’

मैगजीन ने कहा कि सरकार के तमाम फैसलों में बड़े सामाजिक बदलाव की बात की गई, लेकिन अर्थव्यवस्था के मसले को किनारे ही लगा दिया गया। फूड कंपनी निस्सिन फूड्स के इंडिया ऑपरेशन हेड गौतम शर्मा के हवाले से मैगजीन ने लिखा कि भारत में मांग में तेजी से कमी आई है। ग्रामीण भारत की बात करें तो ट्रैक्टर से लेकर मैगी और शैंपू के पाउच तक की डिमांड कम हुई है।

शर्मा के मुताबिक लोग तब उपभोग करते हैं, जब उन्हें अपना भविष्य सुरक्षित लगे, लेकिन सरकार ने उनके भरोसे को खत्म कर दिया है। लेख में ऑटोमोबाइल सेक्टर से लेकर रियल्टी तक की बात करते हुए कहा गया है कि मंदी की स्थिति में लोग अपने कैश को निकालना नहीं चाहते। आर्टिकल में कहा गया है कि निवेशकों का भरोसा खो गया है और जीडीपी में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की हिस्सेदारी निचले स्तर पर जा पहुंची है।

लेख में कहा गया है कि मोदी सरकार अपने ज्यादातर फैसले चुनाव को ध्यान में रख कर करती रही है। मैगजीन में नोटबंदी पर भी सवाल उठाए गए हैं। लेख में कहा गया है कि नवंबर, 2016 में ब्लैक मनी पर लगाम कसने के नाम पर कैश में 90 पर्सेंट हिस्सेदारी रखने वाले 500 और 1000 रुपये के नोटों की मान्यता खत्म कर दी गई थी। हालांकि इससे उलटा असर हुआ और कैश पर निर्भर रहने वाले भारतीयों के पास खर्च के लिए रकम की कमी हो गई। जिसकी वजह से देश की आर्थिक स्थिति खराब होती चली गई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles