saga

‘पंडित’ सागर त्रिपाठी से उन लोगों को आज बहुत कुछ सीखने की जरुरत है. जिनके दिलों में सांप्रदायिकता का जहर इतना बस चूका है कि वे किसी को नमाज पढ़ने, कुरान पढ़ने या वंदे मातरम नहीं गाने पर उसकी जान लेने पर उतारू हो जाते है.

‘पंडित’ सागर त्रिपाठी ‘पंडित’ होकर इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) साहब की शान में शेरो-शायरी करते है. उन्होंने बाकायदा अपनी शायरियों का कलेक्शन लिख डाला है. जो पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) से जुड़ा है.

अयोध्या के राम लला विनय से ट्रस्ट से जुड़े त्रिपाठी विश्व ब्राह्मण परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. वह मुशायरों में अपने ‘नतिया कलाम’ पढ़ते हुए देखे जा सकते है. जिसके लिए उनके घर में दर्जनों अवॉर्ड रखे हुए हैं.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

उनके घर में कुरान हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में मौजूद है. गीता और रामायण को भी वह बराबर महत्व देते हैं. उनकी कविताओं में ना सिर्फ पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) से जुड़ी होती है बल्कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब की रक्षक भी होती है.

वे कहते है कि ‘मोहम्मद साहब सिर्फ इस्लाम से नहीं जुड़े हैं. वह मानवता के लिए हैं और मैं उनका आशीर्वाद लेता हूं, इसमें कुछ भी गलत नहीं है. वह किसी एक कौम के नहीं हैं.’

वह बताते हैं कि उनकी रोजी-रोटी प्रॉपर्टी के बिजनस से चलती है. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन करने वाले सागर को मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी का भी सरंक्षण प्राप्त हो चुका है. इनके दादा चाहते थे कि सागर आईएएस अधिकारी बनें लेकिन कविता के प्रति प्यार के चलते उन्होंने कभी यूपीएससी की परीक्षा ही नहीं दी.

Loading...