नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पद्मनाभस्वामी मन्दिर (Padmanabhaswamy Temple) के प्रबंधन में त्रावणकोर के राजपरिवार के अधिकार को मान्यता दे दी है। जिसके बाद अब मंदिर के प्रबंधन के लिए बनने वाली मुख्य कमिटी में राजपरिवार की मुख्य भूमिका रहेगी।

बता दें कि इस देश के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाता है। बताया जाता है कि मंदिर के पास तकरीबन दो लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। पद्मनाभ मंदिर में 6 तहखाने हैं। सात सदस्यीय टीम अब तक मंदिर के पांच तहखाने खोल चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने छठा तहखाना खोलने पर रोक लगा दी है। अब तक खोले जा चुके तहखानों से दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का खजाना बरामद हो चुका है। यह केंद्रीय शिक्षा बजट और राज्य बजटों से भी ज्यादा है।

फैसले का स्वागत करते हुए त्रावणकोर शाही परिवार ने कहा कि वे फैसले से खुश हैं। एक संदेश में शाही परिवार ने कहा, ”उच्चतम न्यायालय के आज के फैसले को हम पद्मनाभस्वामी का परिवार पर ही नहीं बल्कि सारे श्रद्धालुओं को मिले आशीर्वाद के तौर पर देखते हैं।” शाही परिवार से संबद्ध पूयम तिरुनल गोवरी पार्वती बाई ने कहा, ”हम प्रार्थना करते हैं कि सबको सुरक्षित रखने और सबकी भलाई के लिए उनकी निरंतर कृपा बनी रहे। मुश्किल वर्षों में साथ देने के लिए सबका शुक्रिया। भगवान आपका भला करे।’’

लाइव लॉ वेबसाइट के मुताबिक़ कोर्ट ने मंदिर के आख़िरी कमरे यानी ‘वॉल्ट बी’ को खोले जाने को लेकर कुछ नहीं कहा है और इसके खोले या ना खोले जाने का फ़ैसला प्रशासनिक समिति पर छोड़ दिया है। माना जाता है कि इस अकेले कमरे में ही बाक़ी सब कमरों से ज़्यादा ख़ज़ाना है।

इस मंदिर को लेकर लोगों में तरह-तरह की मान्यताएँ हैं, मिथक हैं। लोगों में मान्यता है कि इसे खोला गया तो बहुत बुरा होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी 2011 में कहा था कि फ़िलहाल वॉल्ट बी ना खोला जाए। उस वक़्त सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज केएसपी राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सेलेक्शन कमेटी बनाई थी।

वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम को कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त किया गया. उन्होंने 577 पेज की एक रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जिसमें मंदिर के प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। उनके सुझावों पर कोर्ट ने 2014 में सीएजी यानी नियंत्रण और महालेखा परीक्षक को मंदिर के खातों का स्पेशल ऑडिट करने के लिए रखा।

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