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नई दिल्ली | पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने नोट बंदी के फैसले पर कई सवाल खड़े किये है. चिदम्बरम ने नोट बंदी का सार एक कहावत के जरीये निकालते हुए कहा की नोट बंदी का हाल वही है की ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’. चिदम्बरम ने नोट बंदी से होने वाले नुक्सान गिनाते हुए कहा की हमें इतना नुक्सान किसी प्राक्रतिक आपदा से होता जितना इस फैसले से हुआ है.

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेसी नेता पी चिदम्बरम ने पत्रकारो से बात करते हुए कहा की नोट बंदी से कोई भी अमीर दुखी नही हुआ है. केवल गरीब, किसान और मजदूर के ऊपर इसकी मार पड़ी है. किसी भी अमीर को नोट बंदी से घाटा नही हुआ. इसने व्यापर जगत की कमर तोड़ दी है. जिसका असर हमें जीडीपी में भी देखने को मिलेगा. और यह आंशिक नही होगा बल्कि इसका प्रभाव लम्बे समय तक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

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कैश लेस इकॉनमी पर बोलते हुए चिदम्बरम ने कहा की भारत जैसे देश में यह मुमकिन नही है. आप कैसे 3 फीसदी को एक दम से 100 फीसदी पर पहुंचा सकते है. इसका केवल सपना दिखाया जा रहा है. कैश लेस इकॉनमी बनाने के लिए इन्फ्रा की जरुरत पड़ती है. हमारे पास इंफ्रास्ट्रक्चर है नही और कैश लेस सोसाइटी की बात करते है.

नोट बंदी के और नुक्सान गिनाते हुए चिदम्बरम ने कहा की गाँव देहात में हालात विस्फोटक हो चुके है. लोगो की रोजी रोटी छीन चुकी है. उनकी नौकरी जा चुकी है. यहाँ तक उनके पास खाने तक के पैसे नही है. अगर लोग इसका विरोध नही कर रहे तो इसका मतलब यह नही है की उनमे रोष नही है. नोट बंदी से गरीब परेशान है और अमीर अभी भी खुश है.

चिदम्बरम ने नोट बंदी को घोटाला बताते हुए कहा की यह केवल अपने उधोगपति दोस्तों को बचाने के लिए उठाया गया कदम है. इससे नुकसान के अलावा कुछ नही मिलने वाला, इसका हाल वो ही होगा की खोदा पहाड़ निकली चुहिया. खुद आरबीआई ने विकास के अनुमान में कमी का अंदेशा जताया है.

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