नई दिल्ली | अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ी टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को बातचीत के जरिये इस मसले का हल निकालने को कहा. हालाँकि सभी राजनितिक पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया का स्वागत किया लेकिन बाबरी मस्जिद कमिटी ने अदालत के बाहर इस मामले को सुलझाने से मना कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल अयोध्या विवाद पर रोज सुनवाई करने की मांग करने वाले बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को बाबरी मस्जिद कमिटी की यह बात अच्छी नही लगी इसलिए उन्होंने बुधवार सुबह एक चेतवानी भरे लहजे में मुस्लिम संगठनों से कहा की या तो सरयू नदी के पार मस्जिद बनाने के उनके प्रस्ताव को मान ले या फिर हम इस पर कानून लाकर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ कर लेंगे.

स्वामी के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए असुदुद्दीन ओवैसी ने कहा की स्वामी जी हमें डरा रहे है और धमकाने की कोशिश कर रहे है. मैं उनसे कहना चाहता हूँ की यह देश कानून से चलता है और यहाँ कानून सबसे बड़ा है. मोदी जी और स्वामी से भी बड़ा. अगर उन्हें इस मुद्दे का हल चाहिए तो वो सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करे की इस मुद्दे की रोजाना सुनवाई हो.

ओवैसी ने कहा की स्वामी हमसे कहना चाहते है की या तो तुम हमारा प्रस्ताव मान लो नही तो हमें इस रास्ते पर चलेंगे. वो हमें डरा रहे है. उनका प्रयास है की यह देश एक हिन्दू राष्ट्र बने और मुस्लिम दोयम दर्जे के शहरी. लेकिन मैं कहना चाहता हूँ की कोई भी देश आस्था से नही चलता. अगर स्वामी जी मसले का हल चाहते है तो वो मोदी जी के पास जाकर कहे की जिस तरह सुप्रीम कोर्ट छुट्टियों में ट्रिपल तलाक की सुनवाई कर रहा है ऐसे ही इस मामले की भी सुनवाई करे. तभी हल निकल सकता है.

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