हैदराबाद | AIMIM प्रमुख असद्दुदीन ओवैसी ने रोहिंग्या मुस्लिमो को वापिस म्यांमार भेजने को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की है. उन्होंने मोदी सरकार पर बरसते हुए कहा की भारत में अगर श्रीलंका के तमिल, बांग्लादेश के चकमा निवासी और तिब्बत के बौद्ध शरण ले सकते है तो म्यांमार के रोहिंग्या मुस्लिम क्यों नहीं? इसके अलावा ओवैसी ने बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन पर भी सरकार को घेरा.

शुक्रवार को एक सभा को सम्बोधित करते हुए असुदुद्दीन ओवैसी ने कहा की जब प्रधानमंत्री जी तस्लीमा नसरीन को अपनी बहन बना सकते है तो म्यांमार के रिफ्यूजी मुस्लमान आपके भाई क्यों नहीं हो सकते? जब तस्लीमा भारत में रह सकती है तो रोहिंग्या मुस्लिम क्यों नहीं? इसके अलावा ओवैसी ने यह भी कहा की रोहिंग्या मुस्लिमो के पास मानवाधिकार आयोग का इजाजत पत्र भी है. फिर किस कानून के तहत आप इनको वापिस भेजेंगे?

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संयुक्त राष्ट्र का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा की भारत सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनना चाहता है लेकिन क्या वहां एक सुपर पावर के रूप में भारत का यही रवैया रहेगा। आप कैसे उन लोगो को वापिस भेज सकते है जो अपना सब कुछ खो चुके है, ये कैसी मानवता है? ओवैसी ने श्रीलंका के तमिलों का जिक्र करते हुए कहा की तमिलों पर श्रीलंका में आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप था, लेकिन क्या इन्हें भारत सरकार ने वापस सौंप दिया?

बांग्लादेश के चकमा निवासी और तिब्बत के बौद्ध का भी जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा की ये लोग आज भी अरुणाचल प्रदेश में शरणार्थी के तौर पर रह रहे है. जबकि  युद्ध के समय ये लोग बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी सेना के खिलाफ पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे. बताते चले की मोदी सरकार ने रोहिंग्या मुस्लिमो को राष्ट्र के लिए खतरा मानते हुए उन्हें वापिस म्यांमार भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

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