NEET परीक्षा मामलें में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया हैं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीएसई को आदेश देते हुए कहा कि 2018-19 से NEET परीक्षा उर्दू में भी होनी चाहिए. हालांकि इस बार होने वाली परीक्षा में उर्दू शामिल नहीं हो सकेगी.

सुनवाई के दौरान सीबीएसई  ने कहा कि सात मई को होने वाली परीक्षा में उर्दू को शामिल नहीं किया जा सकता. 11 हजार छात्रों के लिए NEET पेपर में अतिरिक्त बदलाव संभव नहीं हैं. वहीं केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान कहा कि उन्हें उर्दू को भी शामिल करने में कोई आपति नहीं है लेकिन इस साल परीक्षा में उर्दू को नहीं शामिल कर सकते. आगे के लिए इस पर विचार किया जाएगा.

दरअसल, जमात-ए-इस्लामी हिन्द की छात्र शाखा स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया ने याचिका दाखिल कर कहा था कि नीट की एक भाषा के तौर पर उर्दू को हटाया जाना ‘भेदभावपूर्ण, मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 21 का उल्लंघन है.

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याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा था कि अभी MCI और CBSC ये कह रही थी कि किसी भी राज्य सरकार ने नीट की परीक्षा उर्दू में कराने की गुजारिश नहीं की है. लेकिन अब महाराष्ट्र और तेलंगाना सरकार इसकी मांग कर रहे है. इसके अलावा कुछ और भी राज्य है जो इस पर विचार कर रहे है.

इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, MCI, DCI और CBSC को नोटिस जारी कर 10 मार्च तक जवाब मांगा था. अभी तक नीट की परीक्षा हिंदी, इंग्लिश, गुजराती, मराठी, उड़िया, बंगला, असमी, तेलगु, तमिल और कन्नड़ में होती है.

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