ट्रिपल तलाक के मुद्दें पर केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाया जा रहे विधेयक को पहले ही मुस्लिम संगठन खारिज कर चुके है. अब विपक्ष भी इस विधेयक में सज़ा के प्रावधान के खिलाफ उतर चूका है.

लेफ्ट, कांग्रेस, टीएमसी और एनसीपी समेत विपक्ष का एक बड़ा तबका सज़ा के प्रावधानों के खिलाफ है. दरअसल,  मुस्लिम विमिन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज) बिल को गुरुवार को संसद में पेश किया जाएगा. जिसमे तीन तलाक को  अमान्य करार दिया गया है.

बिल में तीन तलाक देने पर पति के लिए 3 साल तक जेल की सजा का प्रावधान भी रखा गया है. साथ ही तीन तलाक की पीड़ितों को मुआवजे का भी प्रावधान है. बिल को लोकसभा में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को पेश करेंगे.

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इस बिल को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) का कहना है कि तीन तलाक संबंधी विधेयक का मसौदा मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों, शरियत तथा संविधान के खिलाफ है.

बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलील-उर-रहमान सज्जाद नोमानी ने कहा,  तीन तलाक रोकने के नाम पर बने मसौदे में ऐसे प्रावधान रखे गए हैं जिन्हें देखकर यह साफ लगता है कि सरकार शौहरों (पति) से तलाक के अधिकार को छीनना चाहती है.

उन्होंने कहा कि विधेयक के मसौदे में यह भी कहा गया है कि तीन तलाक यानी तलाक- ए-बिद्दत के अलावा तलाक की अन्य शक्लों पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.