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नई दिल्ली | पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावो की तारीखों का एलान हो गया है. 4 फरवरी को मतदान का पहला चरण होगा जबकि 8 मार्च को अंतिम चरण. इसी बीच मोदी सरकार ने 1 फरवरी को आम बजट संसद में पेश करने का फैसला किया है. इसका मतलब यह है की पहले चरण से ठीक तीन दिन पहले आम बजट पेश होगा.

यही बात विपक्षी दलों को नागवार गुजर रही है. विपक्षी दलों का आरोप है की सरकार बजट के जरिये वोटर को प्रभावित कर सकती है. सरकार बजट के जरिये कुछ लोक लुभावन घोषणा करके वोटर्स को बीजेपी के पक्ष में आकर्षित कर सकती है. वैसे आजाद भारत के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब किसी इलेक्शन से पहले आम बजट पेश किया जाएगा.

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आम बजट पेश होने से रोकने के लिए विपक्षी दल आज चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे. कांग्रेस समेत करीब 16 दलों के प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग से आम बजट पर रोक लगाने की मांग की. उधर चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा की विपक्षी दलों ने मांग की है की सरकार को आम बजट पेश करने की इजाजत न दी जाए. हमने उनकी बात सुनी, हम इस मामले को रिव्यु करेंगे.

उधर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्षी दलों के आरोप पर सफाई देते हुए कहा की 2014 में भी इलेक्शन से पहले आम बजट पेश हो चुका है. इसलिए इसे आगे बढाने की कोई जरुरत नही है. अरुण जेटली ने तंज भरे लहजे में कहा की एक तरफ विपक्षी दल कहते है की नोट बंदी से इलेक्शन में कोई फायदा नही होगा तब उन्हें बजट से इतना डर क्यों लग रहा है?

मालूम हो की 2012 में भी इसी तरह की परेशानी सामने आई थी. लेकिन तब के तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बजट को आगे बढ़ाने का फैसला किया था. उस समय आम बजट मार्च में पेश किया गया था. उधर मोदी सरकार के सहयोगी शिवसेना ने भी आम बजट पर रोक लगाने की मांग की है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा की शिवसेना सांसद राष्ट्रपति से मिल आम बजट पर रोक लगाने की मांग करेंगे.

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