Thursday, June 17, 2021

 

 

 

बॉम्बे हाई कोर्ट की जज का फैसला – ‘स्किन टू स्किन टच के बाद अब पैंट की जिप खोलना यौन हिंसा नहीं’

- Advertisement -
- Advertisement -

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने ”किसी लड़की का हाथ पकड़, उसकी पैंट की जिप खोलना यौन हिंसा (Sexual Assault) की परिभाषा में नहीं माना है।” कोर्ट ने पोक्सो कानून की व्याख्या करते हुए ये फैसला सुनाया।

जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला की सिंगल बेंच ने 50 वर्षीय व्यक्ति को पांच साल की बच्ची से छेड़छाड़ के लिए दोषी ठहराए जाने की सजा और सजा के खिलाफ आपराधिक अपील पर ये फैसला सुनाया। हालांकि इससे पहले सत्र न्यायालय ने व्यक्ति को दोषी ठहराया था और उसे POCSO की धारा 10 के तहत “यौन हिंसा” का दोषी पाया था।

इसके चलते उसे छह महीने के कारावास के साथ पांच साल के कारावास और 25,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। नागपुर पीठ ने पाया कि यह मामला “यौन हिंसा” की जगह “यौन उत्पीड़न” के तहत आता है। कोर्ट ने कहा, “आईपीसी धारा 354A (1) (i) के तहत यह यौन उत्पीड़न से जुड़ा है।”

उन्होंने कहा कि यह मामला IPC की  ‘धारा 354A (1) (i) के तहत आता है. 354A 1(i) के तहत किसी महिला को गलत नजरिए से छूना या उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहना; या इच्छा के खिलाफ अश्लील साहित्य या किताबें दिखाना अथवा महिला पर अश्लील टिप्पणी करना शामिल है।

पुलिस ने पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर एक मामला दर्ज किया था, जिसमें कहा गया था कि उसने देखा कि आरोपी की पैंट ज़िप खुला हुआ था और आरोपी ने बेटी का हाथ पकड़ा हुआ था। उसने यह भी गवाही दी कि उसकी बेटी ने बताया कि आरोपी ने उसे सोने के लिए बिस्तर पर आने को कहा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles