खनिज तेल का उत्पादन एवं निर्यात करने वाले देशों के गुट ओपेक और उसके सहयोगी देशों ने तेल उत्पादन को लेकर की गई भारत की अपील को अनसुना कर दिया। दरअसल, भारत ने ओपेक देशों से अपील की थी कि वे कच्चे तेल के उत्पादन पर लागू नियंत्रण हटाकर दाम में कमी लाएं।

उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब की अगुवाई में ओपेक देशों और रुस के नेतृत्व में ओपेक के सहयोगी तेल उत्पादक देशों ने आन लाइन बैठक में तेल उत्पादन  में कटौती की वर्तमान सहमति को बनाए रखने पर जोर दिया था।

भारत सरकार में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओपेक देशों की बैठक से पहले उनसे अपील की थी कि कच्चे तेल के दाम में स्थिरता लाने के लिए वे उत्पादन पर लागू प्रतिबंधों को कम कर दें। उनका कहना था कि कच्चे तेल की अधिक क़ामतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था की रिकवरी पर पड़ रहा है।

ओपेक देशों की बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा में भारत के आग्रह के बारे में पूछे गए सवाल पर सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलाजीज बिन सलमान ने कहा कि भारत को पिछले साल काफी कम दाम पर खरीदे गए कच्चे तेल के भंडार में से कुछ तेल का इस्तेमाल कर लेना चाहिए।

सऊदी उर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलाज़ीज़ बिन सलमान ने कहा कि “मैं अपने मित्र से कहूंगा कि पिछले साल अप्रैल, मई और जून में उन्होंने जो तेल खरीदा था उसे स्टोर से निकालें।”

भारत ने पिछले साल जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम काफी कम चल रहे थे, तब अपने रणनीतिक भंडारों को भरने के लिए एक करोड़ 67 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद की थी। उस कच्चे तेल का औसत मूल्य 19 डॉलर प्रति बैरल था। प्रधान ने 21 सितंबर 2020 को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी थी।