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अयोध्या में बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर की और से की गई सुलह की कोशिश सिर्फ मुस्लिम पक्ष को दबाव में लेने की एक कोशिश है.

दरअसल, श्रीश्री रविशंकर का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण जहां राम लला विराजमान हैं वहीं होना चाहिए जबकि मस्जिद को कुछ दूर शिफ्ट करना ही इस मामले का सही समाधान हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह काम सौहार्द और सहमति से होना चाहिए.

श्री श्री ने कहा कि कोर्ट से इसका सही फैसला संभव नहीं है क्योंकि इसमें एक पक्ष जीतेगा तो दूसरे के दिल में घाव होगा. इसलिए आपस सहमति के जरिए हम एक समाधन तक पहुंच सकते हैं. समाज के सभी प्रबुद्ध लोग सहयोग और सौहार्द दिखाते हुए इस मामले में सहमित बनाएं तो बेहतर होगा.

उन्होंने कहा, यह दिलों को जीतने की बात है. किसी के दिल को ठेस पहुंचा कर कोई काम नहीं हो सकता इसलिए आपस में मिलजुल का बातचीत के जरिए ही इस समस्या का सही समाधन हो सकता है.

ध्यान रहे श्रीश्री रविशंकर का ये बयान ऐसे समय में आया है जबकि सुप्रीम कोर्ट साफ़ कर चूका है कि इस मामले को कोर्ट जमीन विवाद के तौर पर ही देखेगा.

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