लखनऊ | उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनते ही बूचड़खानों को बंद कराने की कवायद शुरू हो चुकी है. प्रदेश भर में एक अभियान चलाकर बूचड़खानों को बंद कराया जा रहा है. सरकार की इस कार्यवाही से मीट व्यापारियों में भारी रोष व्याप्त हो गया है. जहाँ प्रदेश में इस व्यापर से जुड़े काफी लोगो के बेरोजगार होने का खतरा मंडरा रहा है वही सरकार अपने कदम पीछे खींचने के लिए तैयार नही है.

उधर मीट व्यापारियों प्रदेश व्यापी हड़ताल पर चले गए है. यह हड़ताल मीट सप्लायर एसोसिएशन ने बुलाई है. उनका कहना है की म्युन्सिपल कारपोरेशन पुराने लाइसेंस को रिन्यू नही कर रहा है और न ही नए लाइसेंस जारी कर रहा है. हमारे वैध व्यापर को अवैध घोषित किया जा रहा है. मीट व्यापारियों की हड़ताल से दबाव में आई योगी सरकार ने स्थित स्पष्ट करने की कोशिश की है.

योगी सरकार के प्रवक्ता मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया की केवल अवैध बूचड़खानों पर कार्यवाही की जा रही है. एनजीटी के निर्देशों पर यह कार्यवाही की जा रही है. उनके आदेशानुसार अवैध बूचड़खाने बंद कराये जा रहे है. इसके अलावा अंडा और चिकेन बेचने वाली दुकानों को इस कार्यवाही से अलग रखा गया है. जो भी अधिकारी वैध बूचडखानो और इन दूकानो पर कार्यवाही कर रहा है उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.

वही व्यापारियों की बेमियादी हड़ताल में आज मछली व्यापारियों भी शामिल हो गए है. हड़ताल का आह्वान करने वाले एसोसिएशन के एक अधिकारी के अनुसार हम नोट बंदी के वजह से पहले ही काफी नुक्सान में जा चुके है. अगर यांत्रिक बूचड़खाने भी बंद कर दिए गए तो प्रदेश में लाखो लोग बेरोजगार हो जायेंगे और वो किसान जो बेकार हो जानवरों को बेचना चाहते है , ऐसा नही कर पायेंगे. इसलिए सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.

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