बरेली। कंज़ुल ईमान फाउंडेशन के रीसर्च डिवीजन द्वारा मुस्लिम समाज में ज्ञान और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 23 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर एक ऑनलाइन पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया था। इस चर्चा में प्रमुख हस्तियों, व्याख्याताओं, शिक्षाविदों, विद्वानों और इस्लामिक ओलेमा ने भाग लिया। इस आयोजन पर चर्चा करते हुए, एमिटी यूनिवर्सिटी के डॉ० अहमद जुनैद ने बताया कि विद्वानों को वैश्विक शोध में शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए पुराने और नए प्रतिमानों के बीच सामंजस्य बनाने को प्राथमिकता देनी होगी। डाक्टर शाहनवाज़ अहमद मलिक, एएमयू मल्लापुरम कैंपस केरल ने प्राचीन ऐतिहासिक सर्वेक्षणों पर आधारित विभिन्न कारकों और विभिन्न रिपोर्टों पर प्रकाश डालकर शिक्षा और अनुसंधान में मुस्लिम समाज के पतन के कारणों पर परिचर्चा की।

मुनज्ज़मः फलाहिया से सामाजिक कार्यकर्ता अकादमी विद्वान श्री नदीम शेख ने कहा कि हमें शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ बुद्धिमान पैदा करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है। मासिक पत्रिका पयाम ए बरकात के संपादक मौलाना आरिफ रज़ा नोमानी ने बताया कि कुरआन और हदीस में मुसलमानों के लिए जीवन व्यतीत करने का पूरा तरीका मौजूद है और अगर वे इनके अनुसार चलते हैं तो वे अपने लक्ष्यों को अवश्य प्राप्त कर लेंगे। फौज़िया खान ने कहा कि विकासशील समाज के लिए महिलाओं के बीच शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। बुशरा नाज ने इस बात पर सहमति जताते हुए कहा कि मुस्लिम संस्कृति और शरियत महिलाओं के उत्थान में बाधक नहीं अपितु मददगार हैं। शफ़क़ खान ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि सफलता हासिल करने के लिए आधुनिक युग में दीन और दुनिया दोनों का ज्ञान आवश्यक है।

फाउन्डेशन के जनसंपर्क अधिकारी, फरदीन अहमद खान साहब ने कार्यक्रम का संचालन किया और कहा कि एक समय था जब मुस्लिम दुनिया में साहित्य, संस्कृति और दर्शन में अग्रणी थे और बगदाद 9 वीं और 10 वीं शताब्दी में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र था, उन्होंने कहा कि हमें अतीत के इसी गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए काम करना चाहिए। संस्था के रिसर्च प्रमुख श्री यासिर रज़ा कादरी ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संस्था द्वारा समय समय पर विभिन्न कार्यक्रम, प्रकाशन, प्रशिक्षण आदि का आयोजन किया जा रहा है और यह चर्चा भी इस क्रम का एक अभिन्न अंग है।

इसी प्रकार, संस्थान ने रज़वियात पर रिसर्च हेल्प डेस्क और कंज़ुलमान इंटरनेशनल जर्नल आन रजवियात (कैजोर) की भी स्थापना की है, जो शोधकर्ताओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शोध और उसके महत्व को समझने का अवसर देगा। इसके साथ ही, फाउंडेशन ने महिला सशक्तीकरण के लिए कंजुल हया पत्रिका को प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। ZOOM एप में होने वाली इस बैठक में लगभग 100 लोग मौजूद थे और लगभग 300 लोगों ने फेसबुक पर लाइव देखा और लगभग 25 लोगो ने अपनी-अपनी टीम के साथ सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठ कर यह परिचर्चा सुनीI यह परिचर्चा कंनज़ुल ईमान फाउंडेशन के आधिकारिक फेसबुक पेज पर दोपहर 2 बजे से लाइव थी, आगंतुकों ने पैनलिसट्स से भी सवाल पूछे। अंत में, अध्यक्ष श्री अमीर हुसैन साहब ने सबका आभार प्रकट किया।

और सर्वोच्च यह कि इस परिचर्चा ने समाधानों के साथ साथ पतन के विभिन्न कारणों पर भी ध्यान केंद्रित किया। इसलिए, विभिन्न मुद्दों पर चर्चा, फलदायक और परिणाम स्वरूप उत्कृष्ट समाधानों की प्राप्ति हुई।