देश का अन्नदाता आज घास खाने को मजबूर हैं. लेकिन देश की सरकार उनकी सुध तक लेने को तैयार नहीं हैं. पिछले कई दिनों से तमिलनाडु से आए किसान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं. वे रोज नए तरीकों के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन उनकी बात सुनने वाला सरकार की और से कोई नहीं हैं.

नित्य नए प्रदर्शनों को जारी रखते हुए सोमवार को किसानों ने घास खाकर अपना विरोध दर्ज कराया. किसानों का आरोप हैं कि किसान आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बावजूद सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही है. ये किसान अपने साथ आत्महत्या करने वाले किसानों तक खोपड़ियाँ भी लाये हैं.

किसानो का कहना हैं कि वे कर्ज माफी के साथ राहत पैकेज की भी मांग कर रहे हैंलेकिन उनकी मांग सुनी नहीं जा रही हैं. पिछले दिनों उन्होंने निर्वस्त्र होकर पीएमओ के बाहर प्रदर्शन किया था. वे इन मांगो को लेकर प्रधानमन्त्री से मिलना चाहते थे.

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किसानों की मांग है कि सूखा पड़ने से जो उन्हें नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई चालीस हजार करोड़ रुपए का पैकेज देकर की जाए. इसके अलावा इन किसानों की ये भी मांग है कि राज्य में पानी की किल्लत को दूर करने के ठोस उपाय किए जाएं.

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