निजमुद्दीन मरकज के कार्यक्रम से जुड़े मामले में 2500 विदेशी नागरिकों के ब्लैक लिस्ट किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, इस दौरान कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि क्या तबलीगी जमात में शामिल लोगों के व्यक्तिगत वीजा को कैंसल किए जाने का आदेश है? क्या हर विदेशी जो जमात में शामिल हुआ था उनके वीजा कैंसल करने का आदेश अलग-अलग पारित हुआ है?

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से मामले की पैरवी कर रहे वकील सी यू सिंह ने न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि 900 जमातियों को काली सूची में डालने के लिए केवल जनरल नोट जारी किया गया है।

न्यायमूर्ति खानविलकर ने कहा, लेकिन गृह मंत्रालय की अधिसूचना कहती है कि यह फैसला तो अधिकारियों को अलग-अलग मामलों के आधार पर लिया जाना है। हमें यह पता लगाना होगा कि क्या आदेश जारी किये गये?

इससे पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से न्यायालय में दावा किया गया कि वीजा रद्द किये जाने या काली सूची में डाले जाने को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश पारित नहीं किया गया है। सिर्फ एक प्रेस रिलीज जारी हुई और उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या ये आदेश हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग जारी हुआ है या नहीं? अदालत ने कहा कि उनकी समझ बताती है कि हर व्यक्ति के लिए अलग से आदेश पारित होना चाहिए। लेकिन यहां एक प्रेस रिलीज की बात कही जा रही है। हम चाहते हैं कि ये बताया जाए कि आदेश अलग-अलग व्यक्ति के लिए जारी हुआ है?

इस दौरान कोर्ट को याचिकाकर्ता ने बताया कि एक जनरल नोट जारी कर ब्लैक लिस्टिंग की बात कही गई है। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा कि लेकिन मंत्रालय का नोटिफिकेशन कहता है कि फैसला केस दर केस होना है। हम जानना चाहते हैं कि व्यक्तिगत केस में आदेश पारित हुआ है?

इस मामले में केंद्र सरकार को जवाब देना है। तब सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हम जवाब दाखिल करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर वीजा कैंसल हो गया है तो हमे बताया जाए कि अभी तक ये भारत में क्यों हैं? अगर वीजा कैंसल नहीं है तो स्थिति अलग है।

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