दिल्ली दंगे में आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद ने गुरुवार को अदालत में कहा कि उन्हे सेल से बाहर नहीं आने दिया जाता और ना ही किसी से बात करने दी जाती है। एकांतवास में रहने के कारण वह अवसाद व अन्य बीमारियों का शिकार हो रहे है।

कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष सुनवाई के दौरान उन्होने कहा कि उन्हे बगैर दोष साबित हुए ही अलग तरह की सजा दी जा रही है। उसे सेल में एकांतवास में डाल दिया गया है। खालिद ने अदालत से कहा कि सुरक्षा का मतलब यह नहीं है कि उसे बंधक बना दिया जाए।

इससे पहले खालिद को जेल में पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश सोमवार को अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन को दिया। दरअसल, उमर ने अपने आवेदन में जेल में पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग की थी, ताकि न्यायिक हिरासत में उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाया जाए।

अदालत ने 17 अक्तूबर को अपने आदेश में कहा कि जेल नियमों के तहत खालिद को रोजाना की दिनचर्या का पालन करने दिया जाए। अदालत ने कहा चूंकि आरोपी न्यायिक हिरासत में है। इसलिए नियम संख्या 1401 सहित जेल के नियम जो अन्य कैदियों पर लागू हैं, वे आवेदक (खालिद) पर भी लागू होते हैं।

नियम के मुताबिक विचाराधीन कैदी को अल सुबह अपना प्रकोष्ठ छोड़ने, स्वैच्छिक आधार पर काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए और अखबार, पुस्तकालय की पुस्तकें आदि उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

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