Wednesday, September 22, 2021

 

 

 

बीजेपी विधायक संगीत सोम ने अपलोड किया था दंगे को भड़काने वाला विडियो: रिपोर्ट

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लखनऊ मुजफ्फरनगर दंगों पर करीब ढाई साल बाद आई जस्टिस विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट में कहा कि गया है कि सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के तालिबान नियंत्रित इलाके का विडियो जारी किया गया था, जिससे हिंसा भड़की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2013 के दंगों के भड़कने की एक वजह यह गलत विडियो था, जिसे मुजफ्फरनगर का विडियो बताकर शेयर किया गया था। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक इस विडियों में दो लोगों की पीटते हुए दिखाया गया था और कहा जा रहा था कि दो हिंदू युवकों की हत्या कर दी गई है, जिससे हिंसा भड़क उठी।

 

पुलिस अधिकारियों से ली गई जानकारी के हवाले से जस्टिस सहाय आयोग ने कहा है कि यह विडियो बीजेपी के एमएलए संगीत सोम और 229 अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। हालांकि आयोग ने विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई किए जाने की सिफारिश नहीं की है। विधायक के खिलाफ इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज है, आयोग ने कहा कि जब तक इस मामले का कोई नतीजा नहीं आता है, तब तक विधायक पर यह सिर्फ आरोप है।

मुजफ्फरनगर के एक इलाके का बताते हुए जो विडियो शेयर किया गया था, उसमें पाकिस्तानी तालिबान के लड़ाकों ने दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। लेकिन, जो लोग सोशल मीडिया पर इस विडियो को शेयर कर रहे थे, उनका कहना था कि यह अगस्त 2013 में ही मुजफ्फरनगर के कवाल गांव का है। जहां से दंगा भड़कने की शुरुआत हुई थी। कवाल में ही दो हिंदू युवकों गौरव और सचिन की हत्या कर दी गई थी।

रिपोर्ट में ‘टू फिक्स अकाउंटेबिलिटी’ नाम से उल्लिखित चैप्टर में संगीत सोम और 229 अन्य लोगों को दंगों के लिए जिम्मेदार माना है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘बृजभूषण (तत्कालीन आईजी, मेरठ) की ओर से दिए गए सबूतों से पता चलता है कि उन्हें 29 अगस्त को इस बारे में पता चला था कि 23 तारीख को कुछ लोगों ने एक विडियो जारी किया है, जिसका टाइटल था, ‘देखो, सचिन व गौरव की हत्या किस निर्मम तरीके से की गई है।’ रिपोर्ट आगे कहती है, ‘इसके बाद आईजी बृजभूषण ने मुजफ्फरनगर के एसएसपी और सीओ सिटी संजीव बाजपाई को जांच का आदेश दिया था। बाजपाई ने जांच के बाद बताया था कि अगस्त 2012 का पश्चिमी पाकिस्तान का यह विडियो विधायक संगीत सोम और शिवम नाम के युवक ने अपलोड किया था।’

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘यह जानकारी मिलने के बाद लोगों में गलत संदेश न जाए, इस बात को ध्यान में रखते हुए डीएम और एसएसपी ने अखबारों और टीवी चैनलों के माध्यम से यह संदेश दिया था कि यह विडियो मुजफ्फरनगर के कवाल गांव का नहीं है, जहां सचिन और गौरव की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी।’ (NBT)

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