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ओला कैब एक बार फिर से विवादों मे है। इस बार विवाद की वजह एक मुस्लिम शख्स को बुकिंग होने के बावजूद सुनसान इलाके में जबरन उतारे जाने को लेकर है।

जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ पत्रकार असद अशरफ ने लोधी रोड स्थित बीके दत्त कॉलोनी से ‘जामिया नगर’ ले जाने के लिए ओला कैब बुक की थी। लेकिन कैब के ड्राइवर ने उन्हे ‘जामिया नगर’ ले जाने से इंकार कर दिया। इतना ही नहीं वह उन्हे दिल्ली के सुनसान इलाके में शख्स को जबरन गाड़ी से उतारकर फरार हो गया।

पत्रकार असद अशरफ ने बताया कि ड्राइवर बीके दत्त कॉलोनी से तो कैब स्टार्ट कर चल दिया, लेकिन करीब 200 मीटर तक चलने के बाद उसने एक सुनसान इलाके में अचानक से कैब को रोक दिया और पत्रकार से कहा कि वह जामिया नगर नहीं जाएगा आप फौरन गाड़ी से उतर जाओ। जामिया नगर ना जाने का कारण पूछने पर ड्राइवर ने कहा कि वह यह बताना जरूरी नहीं समझता की वह क्यों नहीं जाएगा।

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अशरफ ने इस मामले मे पुलिस और कंपनी दोनों से शिकायत की है। जिसके बाद ओला ने ड्राइवर को नौकरी से निकाल दिया है। ओला ने माफी मांगते हुए पत्रकार से कहा कि उसने ड्राइवर को हटा दिया है। कंपनी ने कहा है कि पिछली रात हुई चौंकाने वाली घटना के लिए हमने ड्राइवर को निकाल दिया है। ओला धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करता है और कभी भी अपने ग्राहकों और ड्राइवर के बीच किसी तरह के भेदभाव की अनुमति नहीं देता। हम आपके द्वारा खड़े हैं और घटना के लिए माफी मांगते हैं।

बता दें कि इससे पहले ओला उस वक्त चर्चा मे आई थी, जब एक क्षिणपंथी ने मुस्लिमों से नफरत के चलते कैब की बुकिंग कैंसिल कर दी थी। और जानकारी देते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “ओला कैब बुकिंग कैंसिल कर दी क्योंकि ड्राइवर मुस्लिम था। मैं अपना पैसा जिहादी लोगों को नहीं देना चाहता हूं। ”

जिसके बाद ओला ने कहा था कि हमारे देश की तरह ओला भी सेक्युलर है और हम अपने ड्राइवर पार्टनर या कस्टमर में जाति, धर्म, लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करते। हम अपने सभी कस्टमर्स और ड्राइवर पार्टनर्स से आग्रह करते हैं कि एक दूसरे का सम्मान करें।

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