जयपुर | भारत में इन्टरनेट की सस्ती सेवा मिलने के बाद व्हाट्सएप मैसेजिंग सर्विस का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है. रोजाना ज्यादा से ज्याद लोग इस सर्विस के साथ जुड़ रहे है. हालात ऐसे है की प्राइवेट कम्पनी हो या कोई सरकारी संसथान , हर जगह व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल अधिकारिक सूचना के आदान प्रदान के लिए हो रहा है. लेकिन शायद ही किसी ने सोचा होगा की ग्रुप से लेफ्ट हो जाना भी अपराध की श्रेणी में आ जायेगा.

हालाँकि किसी भी लॉ बुक या संविधान में ऐसा नही लिखा है की व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल करना या न करना अपराध माना जायेगा. लेकिन राजस्थान में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ एक सरकारी कर्मचारी को व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ना इतना भारी पड़ा की अधिकारी ने उसके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया. अब यह नोटिस चर्चा का विषय बना हुआ है.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

दरअसल राजस्थान की सांगानेर पंचायत समिति की विकास अधिकारी ने करीब 7 ग्राम सेवको के खिलाफ एक अजीबो गरीब कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. पंचायत अधिकारी रिंकू मीणा ने इस नोटिस को जारी करते हुए ग्राम सेवको से पुछा है की आखिर क्यों न आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार है.

इस नोटिस में लिखा है की पंचायत समिति के इस कार्यालय ने राजकीय कार्यों को नियमित और तीव्र गति व समय पर सूचनाओं का आदान-प्रदान करने की दृष्टि एक सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था. यह देखा गया है की आपने बिना कोई कारण बताये यह ग्रुप लेफ्ट कर दिया. आप इस सम्बन्ध में ग्रुप छोड़ने का कारण स्पष्ट करे की क्यों आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही न की जाए. साथ ही नोटिस में हिदायत दी गयी की भविष्य में ग्रुप के साथ बने रहे.

Loading...