प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के कार्यालय को सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे में लाने के सबंध में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस जे. खन्ना, जस्टिस गुप्ता, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एन वी रमण की पांच सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को यह फैसला लिया है।

बता दें कि ये अपीलें सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और शीर्ष अदालत के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के साल 2009 के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें कहा गया है कि सीजेआई का पद सूचना का अधिकार कानून के दायरे में आता है।

कोर्ट ने यह फैसला संविधान के आर्टिकल 124 के तहत लिया है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि ‘ट्रांसपेरेंसी ज्यूडिशियल इंडिपेंडेंसी’ को कमतर नहीं आंकती है। हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया था कि चीफ जस्टिस का पद सूचना के अधिकार के दायरे में आता है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में यह कहा है कि सीजेआई ऑफिस एक पब्लिक अथॉरिटी है। इसमें गोपनीयता बरकरार रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सभी जज आरटीआई के दायरे में आएंगे। पीठ ने स्पष्ट किया कि कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीशों के नामों की सिफारिशों की सिर्फ जानकारी दी जा सकती है और इसके कारणों की नहीं।

पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने उच्च न्यायालय और केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेशों के खिलाफ 2010 में शीर्ष अदालत के महासचिव और केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी द्वारा दायर अपीलों पर गत चार अप्रैल को निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

Loading...
लड़के/लड़कियों के फोटो देखकर पसंद करें फिर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें

 

विज्ञापन