एक निशान, एक विधान और एक संविधान के नारे को अमल में लाते हुए हाल ही में केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले 70 सालों से जम्मू और कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटा दिया। जिससे वहाँ का संविधान और झंडा भी अब गैरकानूनी हो गया।

दूसरी और नगालैंड में मोदी सरकार से शांति वार्ता कर रही  नगा संगठन नैशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (इसाक-मुइवा) ने प्रधानमंत्री को एक खत लिख  राज्य के लिए एक अलग झंडे और अलग संविधान की मांग कर दी है।

NSCN (I-M) का कहना है कि 3 अगस्त, 2015 को हुए समझौते पर दस्तखत के बाद नगा समुदाय के अनूठे इतिहास और स्थिति को 22 साल से चल रही पुरानी शांति प्रक्रिया में आधिकारिक पहचान मिली। हालांकि संगठन का कहना है कि इस फ्रेमवर्क अग्रीमेंट पर मुहर लगे तीन साल हो चुके हैं लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है।

पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी में कहा गया है, ‘मूलभूत मुद्दों पर निर्णय लेने के संबंध में भारत सरकार बहुत धीरे बढ़ रही है। बदलते हालात और अन्य घटनाक्रमों को देखते हुए NSCN अध्यक्ष क्यू टुक्कू और महासचिव टीएन मुइवा पीएम मोदी को खत लिखने को मजबूर हुए हैं। एक सम्मानजनक राजनीतिक समाधान के लिए नगा समुदाय की शंकाओं और असमंजस पर विचार करना चाहिए।’

इस खत में लिखा गया है, ‘नगा फ्लैग (झंडा) और संविधान जैसे मूलभूत मुद्दों के संबंध में यह चिट्ठी लिखी गई है, जिस पर अभी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। इन दो मूल मुद्दों को हल किए बिना कोई भी सम्मानजनक हल दूर की कौड़ी होगा क्योंकि नगा स्वाभिमान और पहचान हमारे अंदर गहरे से रचे-बसे हैं।’

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